मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 27 मई को मंडलीय सभागार में कानून-व्यवस्था की समीक्षा के दौरान कहा था कि पुलिस जरायम जगत से जुड़े लोगों के 10-15 साल का चिट्ठा खंगाले और कार्रवाई करे। मगर, यहां चिट्ठा खंगालने की जरूरत ही नहीं है।
पुलिस के पास पूरी कुंडली मौजूद है और बावजूद इसके कुख्यात बदमाश हत्थे नहीं चढ़ पा रहे हैं। मौजूदा समय में वाराणसी जोन के दस जिलों में 30 से ज्यादा ऐसे खूंखार बदमाश हैं, जिनके ऊपर 10 हजार से ज्यादा का इनाम है लेकिन कमजोर मुखबिर तंत्र के चलते पुलिस छापेमारी करती है, सूचनाएं संकलित करती है लेकिन गिरफ्तारी किसी की नहीं हो पाती है।
गाजीपुर जिले के मुहम्मदाबाद क्षेत्र के अताउर्रहमान उर्फ बाबू उर्फ सिकंदर, महरूपुर के सहाबुद्दीन और बलिया के हल्दी क्षेत्र के चैन छपरा के कौशल कुमार चौबे पर दो लाख का इनाम है।
मऊ सदर विधायक मुख्तार अंसारी के करीबी रहे अताउर्रहमान और सहाबुद्दीन की तलाश सीबीआई को भी है लेकिन दो दशक से दोनों की धमक जरायम जगत में बरकरार है।
जोन के जिलों के 50 हजार के इनामी बदमाशों में वाराणसी के कोतवाली क्षेत्र के कपिलेश्वर गली का विश्वास शर्मा उर्फ नेपाली, जंसा थाना के दीनदासपुर का मनीष सिंह, चौबेपुर के धरहरा का इंद्रदेव सिंह उर्फ बीकेडी, चोलापुर के गोसाईपुर का सुनील यादव, चौबेपुर के धन्नीपुर पचरावां का अजीम अहमद, लखनऊ के आलमबाग के गढ़ी कनौरा हरचंदपुर का सलीम उर्फ मुख्तार शेख, भदोही के गोपीगंज के बर्जीकला का पिंटू उर्फ रुद्रेश उपाध्याय एक अरसे से पुलिस के लिए चुनौती बने हुए हैं।
इसके साथ ही चंदौली केे चकरघट्टा थाना क्षेत्र के देवदत्तपुर निवासी सुभाष बियार पर 35 हजार का और अलीनगर के लौंडा झांसी गांव का मो. शमीम उर्फ सरफराज पर 20 हजार का इनाम है।
एडीजी जोन बी महापात्रा ने कहा कि पुलिस अधीक्षकों को इनामी अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है और इसकी मॉनीटरिंग की जा रही है। समीक्षा कर इनामी अपराधियों पर पुरस्कार की राशि भी बढ़ाई जाएगी।