यह इत्तफाक है या कुछ और। सूबे में नई सरकार बनने से पहले तक मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार बताए जा रहे गाजीपुर के सांसद और केंद्रीय संचार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को शहर में थे।
दोनों बडे़ नेताओं के कार्यक्रम भी थे लेकिन दोनों नेताओं में मुलाकात नहीं हुई। वहीं केेंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री और चंदौली सांसद डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने न केवल सीएम योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार मुलाकात की, बल्कि वह वाराणसी मंडल की समीक्षा बैठक में मौजूद रहे।
दरअसल, जब योगी आदित्यनाथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय कार्यालय में पार्टी के मंडल अध्यक्षों से मुलाकात कर चुनिंदा लोगों की समस्याओं को सुन रहे थे, ठीक उसी समय सिन्हा बीएसएनएल मोबाइल उपभोक्ताओं को 4जी सुविधाओं की सौगात दे रहे थे।
इसका नतीजा यह हुआ कि पहली बार तमाम पार्टी कार्यकर्ताओं ने दोनों ही कार्यक्रमों में शामिल होने से परहेज किया। इस घटनाक्रम को लेकर पार्टी के अंदरखाने तरह-तरह की कानाफूसी शुरू हो गई है। शहर में अटकलों का सिलसिला शुरू हो गया और नए समीकरणों की कयासबाजी का दौर चल पड़ा।
कहा जा रहा है कि केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार होने के बावजूद एक ही शहर में एक ही दिन योगी और सिन्हा के कार्यक्रम एक साथ नहीं होने चाहिए थे। पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता के बीच इसका अच्छा संदेश नहीं जाएगा।