आईआईटी बीएचयू के पहले अंतरराष्ट्रीय पुरातन छात्र समागम का शुभारंभ बुधवार को स्वतंत्रता भवन में हुआ। अमेरिका, सिंगापुर, दुबई, ताइवान, कोरिया, ब्रिटेन आदि से सालों बाद कैंपस आए पुरातन छात्र ने पुरानी यादें ताजा कीं और कीमती पलों को सहेजा भी।
यूं तो समागम का शुभारंभ शाम को स्वतंत्रता भवन में हुआ लेकिन सालों बाद लौटे कैंपस में पुरातन छात्रों की मस्ती तो सुबह से ही शुरू हो गई थी।
लिंबडी चौराहे की चाय और वीटी की कॉफी के साथ ही वे अपने पुराने हॉस्टल में पहुंचे। अपने रूम में पहुंचकर अपने पुराने दिनों को याद किया। मेस का खाना भी खाया।
शाम को स्वतंत्रता भवन में आयोजित उद्घाटन सत्र में ‘प्रौद्योगिकी शिक्षा में मालवीय मूल्य एवं देश के लिए चरित्र निर्माण’ की थीम पर आयोजित इस समागम में बतौर मुख्य अतिथि आईआईटी दिल्ली के मूल्य शिक्षा संसाधन केंद्र के पूर्व निदेशक प्रो. ऋषिराज गौर ने कहा शिक्षाविदों और इंजीनियरों के बीच संवाद बेहद जरूरी है।
राष्ट्र के विकास के लिए जितना विज्ञान और प्रौद्योगिकी महत्व रखता है उतना ही उनमें मानवीय मूल्य निहित होना भी जरूरी है। भारत सरकार के औषधि महानियंत्रक डॉ. जीएन सिंह ने कहा कि भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है।
आज भारत अमेरिका, जापान समेत 200 देशों को दवाएं निर्यात कर रहा है। उन्होंने कहा कि ‘इनोवेशन’ को हमें देश का मंत्र बनाना होगा।
रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने कहा कि देश के पुराने इंजीनियरिंग संस्थान में शामिल आईआईटी बीएचयू विश्व की 200 शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों की सूची में शामिल हो, इसके लिए हमें प्रयास करना होगा क्योंकि इससे नए नए संस्थान इस सूची में आ गए हैं इसलिए हमारा पीछे रहना चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि पुरातन छात्रों का संस्थान के प्रबंधन में पूरा सहयोग लेना होगा। प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया जैसी मुहिम ने देश में असीम संभावनाएं पैदा की हैं।
हमें इसके लिए तैयार होना होगा। बीएचयू के निदेशक प्रो. राजीव संगल द्वारा संस्थान का नया वेब पोर्टल लांच किया गया। अध्यक्षता आईआईटी बीएचयू के बोर्ड ऑफ गवर्नर के चेयरमैन व बीएचयू कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने की।
इस अवसर पर पुराछात्र डॉ. विषनारायण ने बताया कि उनके एसोसिएशन (आईबीजीएए) ने संस्थान के विकास के लिए सात करोड़ रुपये का सहयोग दिया है। स्वागत प्रो. संजय सिंह ने किया। संचालन प्रो. एके त्रिपाठी ने किया।