इसकी खासियत ये है कि इस प्रिंटेड गीता को बिना सूक्ष्मदर्शी लेंस के नहीं पढ़ा जा सकता। इसको देखने के बाद नहीं प्रतीत होता कि इसमें गीता के 18 अध्याय हो सकते हैं। इसकी लंबाई 2.5 सेमी व चौड़ाई 2 सेमी है। यह 164 पेज में लिखी गई है।
दो अतिरिक्त भगवद् गीता मुरादाबाद राजकीय पुस्तकालय और बीएचयू में भी रखी हैं :
भारतीय प्रेस मुंबई ने 1956 में यह छोटी भगवत गीता प्रकाशित की थी। इसकी केवल 100 ही प्रतियां प्रकाशित की गई थीं। इन्हें भारत के अलग-अलग पुस्तकालयों में रखा गया। इसके बाद कोई संस्करण प्रकाशित नहीं किया गया। अब इनकी गिनी चुनी प्रतियां ही बची हैं। इनमें से एक मुरादाबाद के राजकीय पुस्तकालय में है तो दूसरी काशी हिंदू विश्वविद्यालय में।