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World Water Day: गंगा किनारे प्यासी काशी... हर साल 1 मीटर तक नीचे जा रहा जलस्तर, समाधान बताएगी ये खबर

Fri, 22 Mar 2024 11:28 AM IST
अमन विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

World Water Day: गर्मी की शुरुआत हो गई है। आने वाले दिनों में शहर के ज्यादातर इलाकों में पानी की समस्या होने वाली है। ऐसे में हर नागरिक को चाहिए कि पानी की बचत करें, ताकि समस्या का समाधान किया जा सके। आज विश्व जल दिवस के अवसर पर हर जन को संकल्पित होना चाहिए कि वह आने वाली पीढ़ी के लिए पानी बचाए।
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कई क्षेत्रों में भूजल कम होने के कारण ऐसे ही खराब हो चुके हैं कई हैंडपंप। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी शहर के कई नलकूप और हैंडपंप पानी छोड़ चुके हैं। इसका अंदाजा भेलूपुर के मालती बाग और बेनियाबाग में लगे नलकूपों को देखकर लगाया जा सकता है। जो पूरी तरह फेल हो चुके हैं। सन 2000 में बनारस में 10 से 12 मीटर की रेंज में बोरिंग करने पर पानी मिलने लगता था। अब यहां औसतन 20 से 23.90 मीटर की रेंज में बोरिंग करने पर पानी मिल रहा है।

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पहले कम आबादी के चलते भूजल स्तर कम नीचे जाता था। अब आबादी 40 लाख के ऊपर हो चुकी है। ऐसी स्थिति में हर साल 80 सेमी से एक मीटर के रेंज में जलस्तर नीचे जा रहा है। यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में काशी की भी हालत केपटाउन जैसी हो जाएगी। यहां के लोग लोग बूंद-बूंद के लिए तरसेंगे।

जलदोहन के चलते भूगर्भ जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। जल संरक्षण के लिए लंबे समय से कवायद चल रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। यही कारण है कि साल दर साल पानी का जलस्तर नीचे जा रहा है। बारिश के बाद पानी का जलस्तर सबसे ऊपर होता है। बारिश से पहले यह जलस्तर नीचे चला जाता है। शहर के कुछ क्षेत्रों के अलावा आराजी लाइन, हरहुआ ब्लॉक, पिंडरा ब्लॉक डार्क जोन में हैं। यहां बोरिंग प्रतिबंधित है। इनके अलावा बड़ागांव, चिरईगांव, चोलापुर, काशी विद्यापीठ व सेवापुरी ब्लॉक क्रिटिकल जोन में हैं।

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तालाबों को पाटने से वाटर रिचार्जिंग हुई कम

जलकल विभाग के रिटायर्ड अधिकारी एपी सिंह ने बताया कि पहले तालाब-पोखरे काफी होते थे। इनको पाटने से वाटर रिचार्जिंग कम हुई है। शहरी क्षेत्र में जलस्तर नीचे जाने की वजह नदी आधारित सरकारी पेयजल योजनाओं का फेल होना है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी नहरों के अभाव के कारण भूगर्भीय जल से ही सिंचाई हो रही है। 20 लाख की शहरी आबादी के साथ ही कल-कारखानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए भूगर्भीय जल का अतिदोहन किया जा रहा है।

वर्जन
जल संरक्षण की दिशा में कई कदम उठाए जा रहे हैं। मनरेगा से सभी ब्लॉकों में पोखरे और तालाबों की खोदाई कराई गई है। इसके अलावा कुछ सरकारी भवनों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाई गई है। जहां नहीं लगे हैं वहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाई जाएगी। - हिमांशु नागपाल, मुख्य विकास अधिकारी

शहर और ब्लॉक का जल स्तर मीटर में
स्थान मानसून पूर्व मानसून बाद
कचहरी 18.20             17.15
सारनाथ 16.90 15.86
गोदौलिया 19.01  18.19
लंका  18.17   17.80
आराजीलाइन ब्लॉक  16.42             11.79
बड़ागांव ब्लॉक  12.25             09.06
चिरईगांव ब्लॉक  15 .28             09.45
चोलापुर ब्लॉक  10.00             07.00
हरहुआ ब्लॉक  16.97             14.80
काशी विद्यापीठ ब्लॉक  2.82             07.79
पिंडरा ब्लॉक  16.49             14.29
सेवापुरी ब्लॉक  14.11             08.23

ऐसे होगा समाधान
  • पानी की बर्बादी रोकी जाए
  • रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था हो
  • टपका सिंचाई का संयंत्र लगाया जाए
  • गर्मी आने से पहले हैंडपंपों की मरम्मत हो
  • जल संकट से पड़ने वाले प्रभाव
  • सिंचाई के लिए नहीं मिलेगा पानी
  • गर्मी में तेजी से सूखेंगे हैंडपंप और कुएं
  • पीने के पानी के लिए हाहाकार मचेगा
  • पालतू जानवरों के लिए समस्या खड़ी होगी

पानी बचाने के तरीके
  • टूथ ब्रश करते समय यदि नल लगातार खुला रहता है तो एक बार में 4-5 लीटर पानी बह जाता है, इसलिए नल खुला न छोड़ें।
  • शॉवर, स्वीमिंग पुल और बाथ टब की बजाय सामान्य रूप से नहाने से बचेगा पानी।
  • बर्तन धोने के लिए नल की जगह बाल्टी या टब का इस्तेमाल करके पानी बचाया जा सकता है।
  • कार साफ करने के लिए बाल्टी में इस्तेमाल करें, इससे हर बार आप करीब 130 लीटर पानी बचा सकते हैं।
  • प्रत्येक आरओ मशीन में हर साल करीब 14 हजार लीटर पानी नष्ट होता है इस पानी का इस्तेमाल पेड़-पौधों को सींचने और गाड़ी धोने में किया जा सकता है।
  • वॉशिंग मशीन में कपड़ा धोने से पानी ज्यादा खर्च होता है इसलिए कम कपड़े हैं तो हाथ से धोएं।
  • बाथरूम में लीकेज से पानी बर्बाद हो जाता है, इसलिए तुरंत सुधरवा लिया जाना चाहिए।
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