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विश्व जल दिवसः रसातल में जा रहा धरातल का पानी, संकट आना तय

Thu, 22 Mar 2018 04:47 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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हर साल घट रहा गांगा का जलस्तर, घाटों को छोड़ गंगा हो गईं दूर - फोटो : अमर उजाला
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दिन-रात हो रहे जल के दोहन ने लोगों के सामने जल संकट खड़ा कर दिया है। बनारस में स्थिति बहुत खराब है। पिछले सात सालों में यह जलस्तर एक से दो मीटर तक नीचे चला गया है। कई क्षेत्रों में सूखे की स्थिति बन गई है। समस्या के समाधान के लिए कोई कारगर उपाय होते नहीं दिख रहे।
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 पेड़ पौधों को काटकर बनाए जा रहे कंक्रीट के जंगल से लगातार जल स्तर कम होता जा रहा है। शहर के तालाब और कुंड अपने वजूद के लिए जूझ रहे हैं। पानी के अभाव में सभी सूख चुके हैं, जो पानी बचा भी है वह इतना गंदा है कि उससे संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है।

शहर में पेयजल के लिए लगाए गए ट्यूबवेल भी पानी छोड़ने की कगार पर पहुंच चुके हैं। यही स्थिति रही तो आने वाले 10 सालों में काशी शहर को पानी के लिए तरसना पड़ेगा। ऐसे में लोगों में जल के दोहन को लेकर जागरूकता लानी होगी, तब जाकर बूंद-बूंद को संरक्षित किया जा सकेगा।
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अस्सी और वरुणा के बाद गंगा भी छोड़ रहीं साथ 
वरुणा और अस्सी नदी के बीच बसे इस वाराणसी शहर में दोनों नदियां अपना मूल स्वरूप खो चुकी हैं। अस्सी नाला बन गई है तो वरुणा शहर का गंदा पानी ढो रही है।

एक बची मोक्षदायिनी गंगा तो वह भी प्रदूषित होने के साथ ही इस बार घाटों से इस समय ही 60 फीट दूर हो चुकी हैं। यही स्थिति रही तो प्राचीन और पौराणिक कहा जाने वाला शहर पानी के तरस जाएगा। 
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वजूद के लिए जूझ रहे बनारस के 60 तालाब और कुंड

वजूद के लिए जूझ रहे बनारस के 60 तालाब और कुंड - फोटो : अमर उजाला
वरुणा और अस्सी नदी के बीच में करीब 60 तालाब और कुंड हैं, जो अपने वजूद के लिए लड़ रहे हैं। पुष्कर तालाब जिसका पौराणिक महत्व है। वह भी संरक्षित नहीं है। भदैनी  का सोनभद्र तालाब जहां चर्मरोग ठीक होता था, वह प्रदूषण के रोग से व्यथित है। कुरुक्षेत्र तालाब, चंदन तालाब, शंकुल धारा, ईश्वरगंगी सहित कुल 60 ऐसे जल श्रोत हैं, जिन्हें अब बचाने की जरूरत है। इसमें सरकार के साथ जन सहयोग की भी जरूरत है।

काशी में एक दर्जन ट्यूबवेल रिबोर की स्थिति में
शहर में चाहे जितना नगर निगम की ओर से व्यवस्थाएं की गई हों, इसके बाद भी करीब एक दर्जन ट्यूबवेल सूखे की मार झेल रहे हैं। जल निगम ने इनकी सूची बना ली है, जो इस माह के अंत तक उनको रिबोर किए जाने है। ये सभी पंप अब तक 180 से 200 फीट तक चल रहे थे, जिन्हें अब 200 से 220 फीट नीचे किया जाएगा। अगर इन सभी बोरिंगों को रिबोर नहीं किया गया तो उन क्षेत्रों के लोगों को पेयजल के लिए जूझना पड़ेगा।

ये है भूगर्भ की स्थिति मीटर में 
क्षेत्र- वर्ष 2011--2017
काशी विद्यापीठ - 11.57--12.5
सारनाथ 12.2-- सूखा
चोलापुर 11.40--11.65
पिंडरा   17.35--सूखा
पांडेयपुर 6.60--7.60
लंका क्षेत्र  6.81-- 7.1
मलदहिया  19.85--20.60
कपसेठी  12.55--14.80

एक नजर शहर की पेयजल व्यवस्था पर
शहर की जनसंख्या- 20 लाख
प्रतिदिन पेयजल की आवश्यकता- 440 एमएलडी
नदी से पेयजल उपलब्धता की स्थिति- 100 एमएलडी
नलकूपों से पेयजल की स्थिति 211 एमएलडी
प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन पेयजल की उपलब्धता 92 लीटर
पेयजल की शहर में कमी 129 एमएलडी
 
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