ढाई महीने में 3500 नए मरीजों की पहचान हुई है। इसमें जांच के बाद 1200 लोगों में फेफड़े की टीबी की पुष्टि हुई है। हर साल 24 मार्च को विश्व क्षय रोग दिवस मनाया जाता है। इसमें टीबी होने के कारण, बचाव, इलाज के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है। फेफड़े की टीबी सहित इस बीमारी के शरीर के अन्य भागों पर पड़ने वाले प्रभाव और उपचार की जानकारी दी जाती है।
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डायबिटीज और स्ट्रॉयड का ज्यादा सेवन करने से कम होती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
आईएमएस बीएचयू के टीबी एंड चेस्ट डिपार्टमेंट के पूर्व अध्यक्ष प्रो. जीएन श्रीवास्तव का कहना है कि पहले से डायबिटीज और स्ट्रॉयड का अधिक सेवन करने वाले, शरीर में कैल्शियम की कमी वाले लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ऐसे लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। ऐसा इसलिए कि पहले से ही कई तरह की बीमारियों की वजह से रोग प्रतिरोधक क्षमता कम रहती है। इस वजह से फेफड़े पर इसका असर ज्यादा होता है। महिलाओं को अपने खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. पीयूष राय का कहना है कि एक जनवरी से 15 मार्च तक 3500 टीबी के नए मरीजों की पहचान हुई है। इसमें नियमानुसार जांच कराई गई तो करीब 1200 लोगों में फेफड़े की टीबी की पुष्टि हुई है। धूल व धुएं के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी इसकी मुख्य वजह रही। अगर सांस लेने में तकलीफ हो रही हो या खांसी लंबे समय से आ रही है तो बीएचयू अस्पताल, मंडलीय, जिला अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क जांच कराई जा सकती है। यही नहीं टीबी की पुष्टि होने पर निशुल्क उपचार भी कराया जाता है।
ये भी जानें
- वर्तमान में कुल टीबी के मरीज : 6500
- एक जनवरी से 15 मार्च तक नए मरीज : 3500