बीएचयू के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपक मिश्रा ने कहा कि कोरोना काल में घर पर रहने के दौरान बच्चों ने पढ़ाई के लिए सबसे अधिक मोबाइल, लैपटॉप का प्रयोग किया। इससे उनकी आंखों में सूखापन या आंसू की कमी हो गई। ओपीडी में इस तरह की समस्या लिए 20 साल से कम उम्र के युवा आ रहे हैं। इसे कंप्यूटर विजन सिंड्रोम होने कहा जाता है। उन्हें बहुत देर तक स्क्रीन पर काम न करने और बीच-बीच में आंखों को आराम देने की सलाह दी जा रही है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ और लांयस आई बैंक के सचिव डॉ. अनुराग टंडन इन दिनों नेत्रदान के प्रति जागरूकता को लेकर बड़ी मुहिम चला रहे हैं। लोगों में केवल जागरूकता ही नहीं बल्कि समय-समय पर नि:शुल्क जांच शिविर में जांच और नि:शुल्क ऑपरेशन कर आंखों को रोशनी देने में लगे हैं। डॉ. टंडन ने बताया कि अब तक चार हजार लोगों का नेत्रदान करा चुके हैं।
बताया कि इन दिनों ग्लूकोमा की समस्या बढ़ रही है। इस पर समय से ध्यान न देने पर यह बीमारी बढ़ जाती है और सिरदर्द आदि की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में लोगों को समय-समय पर आंखों की जांच कराते रहना चाहिए।
अब तक सबसे कम उम्र 28 घंटे के नवजात शिशु और सबसे अधिक आयु 105 साल की महिला का नेत्रदान कराकर उन्होंने रिकार्ड भी बनाया है। अब तक 11 लाख लोगों की नि:शुल्क जांच करीब सवा लाख लोगों को नि:शुल्क मोतियाबिंद का आपरेशन कर ज्योति प्रदान की है। बताया कि शारदीय नवरात्र से चैत्र नवरात्र तक नि:शुल्क ऑपरेशन, नि:शुल्क परामर्श, नि:शुल्क चश्मा दिया जाएगा।