बीएचयू के मौसम विज्ञानी प्रो. मनोज श्रीवास्तव के अनुसार पिछले कई वर्षों से प्रदूषण का स्तर बढ़ता ही जा रहा है, जो वातावरण के साथ-साथ हम सभी के सेहत के लिए भी घातक सिद्ध हो रहा है। वातावरण में बदलाव का ही असर है कि समय से पहले गर्मी भी अधिक इस बार देखने को मिल रही है। जिस तरह से गाड़ियों से निकलने वाले धुएं पर अंकुश नहीं लगाया जा रहा है, उससे निश्चित ही उसका असर मौसम पर पड़ेगा।
प्रो. श्रीवास्तव ने बताया कि कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा भी बढती जा रही है, जिसे कम करने की दिशा में वैश्विक स्तर पर पहल चल रही है। पश्चिमी विक्षोभ की अगर बात करें तो बनारस और आसपास के इलाकों में इसका असर कम देखने को मिलता है, इसका सबसे अधिक प्रभाव पश्चिमी यूपी के साथ ही पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, कश्मीर, दिल्ली आदि जगहों पर पर पड़ता है। बताया कि अब भी समय है अगर लोग पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम आगे नहीं बढ़ाएं तो स्थिति भयावह हो जाएगी।