न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अरविंद सिंह ने बताया कि बच्चों में इस प्रकार की आदत खतरनाक है। माता-पिता परेशान होकर यहां ले आ रहे हैं। सबसे बड़ी बात बच्चों को इस प्रकार की समस्या के लिए अत्यधिक दवा नहीं दी जाती है। प्रयास रहता है कि उनकी काउंसिलिंग से ही उनके जीवन और आचरण में सुधार लाया जाए। नेत्र विशेषज्ञ डॉ. निवेदिता पाठक के मुताबिक, लंबे समय तक रील देखने की आदत आंखों की विजन को कमजोर कर रही है। ऐसी समस्याएं बच्चों में ज्यादा आ रही हैं।
बच्चों में रील देखने की आदत सोचने, समझने और याद रखने की क्षमता को कमजोर कर रही हैं। इन समस्याओं को समाप्त करने के लिए अभिभावकों को प्रयास करना पड़ेगा कि बच्चे मोबाइल का इस्तेमाल कम करें। दवा हर बीमारी का समाधान नहीं है। - डॉ. सीपी मल्ल, निदेशक, मानसिक अस्पताल।