नहीं हैं प्लास्टिक सर्जन
जिले में गर्मी में आग लगने से झुलसने वालों की संख्या बढ़ जाती है। बर्न केस वाले मरीजों को इलाज के लिए प्लास्टिक सर्जन तक नहीं मिल पाते हैं। दस साल से अधिक समय हो जाने के बाद भी जिले में अब तक किसी प्लास्टिक सर्जन की तैनाती नहीं हुई है।
ऐसे में बिना प्लास्टिक सर्जन के ही बर्न केस वाले मरीजों का उपचार कराया जाता है। मंडलीय अस्पताल और बीएचयू को छोड़कर किसी और दूसरे सरकारी अस्पताल में बर्न यूनिट भी नहीं है। केवल मंडलीय अस्पताल में ही 20 बेड की बर्न यूनिट है।