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पहली बार देश-विदेश में लाइव होगा विश्व प्रसिद्ध 'संकट मोचन संगीत समारोह'

Thu, 29 Mar 2018 02:29 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
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संकट मोचन संगीत समारोह - फोटो : facebook
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यूनेस्को द्वारा घोषित सिटी ऑफ म्यूजिक और देश की सांस्कृतिक नगरी काशी एक बार फिर ‘संगीत महाकुंभ’ के लिए तैयार है। मौका है विश्व प्रसिद्ध संकट मोचन संगीत समारोह का। शतकीय सोपान की ओर बढ़ रहा संकटमोचन संगीत समारोह पहली बार देश-विदेश में लाइव होगा।
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चार से नौ अप्रैल तक होने वाले संगीत के इस छह दिवसीय महाकुंभ के सोशल मीडिया पर सजीव प्रसारण की तैयारी आईआईटी बीएचयू के छात्रों ने डिजाइन इनोवेशन सेंटर के सहयोग से की है। फेसबुक और यूट्यूब पर देश-दुनिया के संगीत प्रेमी घर बैठे इसे लाइव देख सकेंगे। महोत्सव की झलकियां ट्विटर और इंस्टाग्राम पर भी उपलब्ध होंगी।

संकट मोचन संगीत समारोह की अपनी ख्याति है। दुनिया भर के संगीत प्रेमियों को इसका इंतजार रहता है। देश भर के कलाकार समारोह में इसमें हाजिरी लगाते हैं।

आयोजन से जुड़े प्रो. वीएन मिश्रा ने बताया कि डिजिटल इंडिया के तहत महोत्सव की झलक पूरी दुनिया को दिखाने के लिए बीएचयू डिजाइन इनोवेशन सेंटर के अंकित श्रीवास्तव के नेतृत्व में आईआईटी बीएचयू के 20 से अधिक छात्रों की टीम सक्रिय हो गई है। लाइव प्रसारण के लिए ड्रोन कैमरे की भी मदद ली जाएगी।
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गौरतलब है कि दो साल से संकट मोचन संगीत समारोह के नाम से बने फेसबुक पेज के माध्यम से समारोह को प्रसारित किया जा रहा है। बड़े कलाकारों के आने पर टीवी चैनलों पर भी सजीव प्रसारण होता है।

 

संगीत के साथ कला का भी होगा संगम

संगीत के साथ कला का संगम आकर्षण का केंद्र होगा - फोटो : facebook
संकट मोचन के दरबार में संगीत के साथ कला का संगम आकर्षण का केंद्र होगा। स्थानीय कलाकार हनुमान जी के विभिन्न स्वरूपों पर आधारित पेंटिंग को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

समारोह के दौरान परिसर में इन पेंटिंग्स की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। संगीत से जुड़ी काशी की महान विभूतियों गिरिजा देवा और लच्छू महाराज की स्मृति में भी उनकी पेंटिंग भी यहां लगाई जाएगी।

मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र के निर्देशन में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से आनंद वन ग्रुप, संस्कार भारती यूपी और संकट मोचन फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में कलाकारों ने हनुमत के विभिन्न रूप बनाए हैं।

वेद प्रकाश मिश्रा, विद्यापीठ के डॉ. सुनील विश्वकर्मा, सुनील कुशवाहा (बीएचयू), सालनी यादव, ड़ॉ. शारदा सिंह, ड़ॉ. रीना सिंह, स्नेहलता, बलदाऊ वर्मा, पूजा शाहू, आशीष प्रजापति, राजीव शाहू सहित दो दर्जन कलाकार इनमें रंग भरने की तैयारी कर रहे हैं।

संगीत आयोजकों के इस अनूठे प्रयोग युवाओं के बीच वाराणसी के विभूतियों को जानने और समझने का भरपूर मौका मिलेगा। 
 
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गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है संकट मोचन संगीत समारोह

- फोटो : अमर उजाला
गोस्वामी तुलसी दास द्वारा स्थापित संकट मोचन मंदिर में यूं तो हनुमत जयंती से ही शुरू हो जाता है भजन-कीर्तन,पूजा पाठ। इसकी शुरूआत स्वयं स्वामी गोस्वामी तुलसी दास ने 471 साल पहले की थी। लेकिन तब मंदिर परिसर में रामलीला और रामायण का पाठ ही होता रहा।

कालांतार में मंदिर के महंतों ने इसे अखिल भारतीय स्तर के संगीत समारोह का स्वरूप दिया। इतना ही नहीं मंदिर के पूर्व महंतों ने संगीत के मार्फत गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करने की कोशिश की। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय  स्तर के मुस्लिम कलाकारों को हनुमत दरबार में बुलाने की परंपरा शुरू की।

मंदिर के महंत परिवार की ओर से शुरू इस परंपरा का हर मुस्लिम कलाकार ने गर्मजोशी से स्वागत किया और वे संकट मोचन दरबार में आकर रामभक्त हनुमान के सनिध्य में अपनी कला का मुजाहिरा करने को अपना सौभाग्य मानते रहे।

इस बार चार अप्रैल से शुरू हो रहे संगीत समारोह में भी आयोजकों ने कई मुस्लिम कलाकारों को आमंत्रित किया है। संगीत समारोह के दौरान मंदिर के आंगन में सौहार्द का संगीत सुनाई पड़ेगा। 
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