गाय का रूप धारण कर पृथ्वी ब्रह्मा जी के पास जाती हैं। रामचरित मानस के बालकांड की चौपाई के बाद लीला को कुछ समय के लिए विराम दिया गया। इसके साथ दूसरे प्रसंग में लाल श्वेत महताबी को रोशनी से नहाया रामबाग पोखरा क्षीरसागर में तब्दील हो गया। शेष शैय्या पर लेटे श्रीहरि की झांकी सजाई गई। उनके चरण दबातीं भगवती लक्ष्मी व नाभि से निकले कमल पुष्प पर आसीन ब्रह्मा की मनोहारी झांकी देख श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव का जयघोष किया।
शान से निकली शाही सवारी :
परंपरा के अनुसार शाम लगभग पांच बजे दुर्ग से काशी नरेश महाराजा अनंत नारायण सिंह की बग्घी पर शाही सवारी निकली। सबसे आगे पुलिस की जीप और उसके पीछे बनारस स्टेट का ध्वज लिए घुड़सवार चले। दुर्ग से बाहर आते ही इंतजार में खड़े अपार जनसमुदाय ने हरहर महादेव के उद्घोष से अगवानी की। लीला स्थल पर 36वीं वाहिनी पीएसी की टुकड़ी ने प्लाटून कमांडर रमाकांत यादव के नेतृत्व में हाथी पर सवार महाराज को सलामी दी। इसके साथ ही माह भर शरद पुर्णिमा तक चलने वाली रामलीला का शुभारंभ भी हो गया।
पहुंचे पंच स्वरूप :
दोपहर दो बजे पंच स्वरूपों का व्यासगणों की निगरानी में साज-शृंगार किया गया। मुकुट पूजन कर विधि विधान से धारण कराया गया। चार बजे उन्हें कंधे पर बैठा कर दुर्ग पहुंचाया गया। रस्म पूरी कर बैलगाड़ी से उन्हें लीला स्थल ले जाया गया। इसके साथ ही लीला स्थल जयघोष से गूंज उठा।
बाग बगीचे हुए गुलजार :
रामलीला के नेमियों व श्रद्धालुओं के जय सियाराम के आपसी अभिवादन से लीला स्थल का माहौल गुलजार हो उठा। एक वर्ष बाद मिले लीलाप्रेमियों ने गले मिलकर एक-दूसरे का कुशल क्षेम जाना। गंगातट सहित प्रमुख सरोवरों, तालाबों के तट पर साफा-पानी जमाया। कुछ ही देर में इत्र की खुश्बू से लीलास्थल भी महक उठा।
श्री रामरमी सरकार रामलीला टूड़ीनगर की रामलीला रावण जन्म के साथ शुरू हुई। पहले दिन रावण जन्म, दिग्विजय, क्षीरसागर की झांकी, देवस्तुति और आकाशवाणी का मंचन हुआ। लीला का मंचन 11 अक्तूबर तक होगा। यह जानकारी आनंद देव सरकार ने दी।