शास्त्रों में पौधे लगाने का स्वर्ग के अधिकार जैसे विशेष फल बताया गया है। वहीं, स्कंपुराण में राशि और नक्षत्र के अनुसार अगर हम पौधरोपण करते हैं तो इससे उत्तम फल की प्राप्ति होती है।
वृक्ष मानव जीवन के आधार होते हैं। सनातन धर्म में हर वृक्ष पर देवों का वास होता है, जिनकी पूजा होती है। आचार्य विकास मिश्र व आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि शास्त्रों में पंच पल्ल्व का भी वर्णन हैं। इसमें आम, बरगद, पीपल, पाकड़ और गुलर शामिल है। इनको पूजन में शामिल किया जाता है। जन्म नक्षत्र एवं जन्म राशि के अनुसार वृक्षों का रोपण करने सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और जीवन में समृद्धि आदि है।
जन्म नक्षत्र के अनुसार ये पौधे लगाएं
अश्विनी नक्षत्र में कुचिला व बांस, भरणी में आंवला व फालसा, कृतिका में गूलर, रोहिणी में खैर, मृगशिरा में खैर, आद्रा में रेशम व बहेड़ा के पौधे लगाने चाहिए। इसी तरह पुनर्वसु में बांस, पुष्य में पीपल, आश्लेषा में नागकेसर व गंगेरन, मघा में बरगद, पूर्वा फाल्गुनी में ढांक लगाने की मान्यता है। उत्तराफाल्गुनी में पाकड़ व रुद्राक्ष, हस्त में रीठा, चित्रा में बेल व नारियल, स्वाति में अर्जुन, विशाखा में कटाई व बकुल, अनुराधा में मौलश्री, ज्येष्ठ में चीड़ व देवदारु के पौधे रोपे जाते हैं। वहीं, मूल में साल, पूर्वाषाढ़ा में अशोक, उत्तराषाढ़ा में कटहल व फालसा, श्रवण में मदार (आक), धनिष्ठा में शमी, शतभिषा में कदंब, पूर्वा भाद्रपद में आम, उत्तराभाद्रपद में नीम और रेवती नक्षत्र में महुआ के पौधे लगाएं।
राशि वाले ये पौधे लगाएं
मेष: खादिर, वृष: गूलर, मिथुन: अपामार्ग, कर्क: पलाश, सिंह: आक, कन्या: दुर्बा, तुला: गूलर, बृश्चिक: खादिर, धनु:पीपल, मकर: शमी, कुंभ: शमी, मीन: कुश