प्रो. एनके अग्रवाल का कहना है कि कम उम्र में डायबिटीज होने की वजह शरीर में ऑटो इम्यून रिएक्शन है। इसमें बीमारियों को बढ़ावा देने वाले वायरस प्रभावी रहते हैं। इससे शरीर का बीटा सेल लॉस होता है। आम तौर पर बचपन में निमोनिया, अस्थमा होने के बाद इस बीमारी को बढ़ावा देने वाले वायरस सक्रिय होते हैं। बच्चों को भूख न लगना, कमजोरी, मुंह में फल खाने जैसी दुर्गंध, बेहोशी की समस्या दिखे तो तुरंत डायबिटीज की जांच कराएं।
राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में काय चिकित्सा एवं पंचकर्म विभाग के डॉ. अजय कुमार का कहना है कि इन दिनों ओपीडी में 30 साल से कम उम्र वाले लोग भी मधुमेह की समस्या लेकर आ रहे है। इसके पीछे कुछ लोगों में अनुवांशिक जबकि अधिकांश लोगों में सही जीवन शैली न होने की वजह है। मधुमेह में शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पातीं हैं। बीमारी पर नियंत्रण में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति उपयोगी है। जामुन, करेला, मेथी, हल्दी, विजयसार, आंवला, पनीर का फूल आदि के सेवन से बहुत हद तक बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है।