फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पूर्वांचल में पहली बार: वाराणसी के कैंसर अस्पताल में अब रेडियो न्यूक्लाइड थेरेपी से इलाज

Fri, 04 Feb 2022 12:53 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी स्थित महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र और होमी भाभा कैंसर अस्पताल में पूर्वांचल के विभिन्न जिलों और बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड से भी बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। 
विज्ञापन
होमी भाभा कैंसर अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

वाराणसी स्थित महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र और होमी भाभा कैंसर अस्पताल में अब मरीजों का रेडियो न्यूक्लाइड थेरेपी से इलाज होगा। इसके शुरू होने से अब थायराइड कैंसर, न्यूरो इंडोक्राइन ट्यूमर, न्यूरो ब्लास्टोमा आदि कैंसर के इलाज में राहत होगी। मरीजों के इलाज के लिए दूसरे शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

विज्ञापन


विश्व कैंसर दिवस पर संस्थान की ओर से इस विधि के बारे में मरीजों को जागरूक किया जा रहा है।  लहरतारा और सुंदर बगिया स्थित कैंसर अस्पताल में वाराणसी के साथ ही पूर्वांचल के विभिन्न जिलों और बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड से भी बड़ी संख्या में मरीज आते हैं।

डॉ. वरुण शुक्ला ने बताया कि रेडियो न्यूक्लाइड थेरेपी में रेडियो-आयोडिन , पीएसएमए , एमआईबीजी, डोटाटेट एवं समेरियम थेरेपी मुख्य रूप से शामिल हैं। रेडियो आयोडिन थेरेपी जहां थायराइड के कैंसर के इलाज के लिए खास है।
विज्ञापन

पढ़ेंः खांसी के तरीके से हो सकेगी टीबी की पहचान, गोपनीय रखी जाएगी लोगों की पहचान

वहीं, डोटाटेट न्यूरो इंडोक्राइन ट्यूमर, एमआईबीजी न्यूरो ब्लास्टोमा फीयोक्रोमोसाइटोम पैरागैंगलियोमा, जबकि समेरियम हड्डी से जुड़े कैंसर के इलाज में बेहद अहम है। निदेशक डॉ. सत्यजीत प्रधान ने बताया कि पूर्वांचल में इस तरह की थेरेपी करने वाला होमी भाभा कैंसर अस्पताल पहला संस्थान है। आने वाले दिनों में और भी नई सुविधाओं की शुरुआत की जाएगी। 
विज्ञापन

ब्लड इरेडिएशन की सुविधा भी शुरू

कैंसर अस्पताल में मरीजाें की सुविधा के लिए ब्लड इरेडिएशन की सुविधा भी शुरू की गई है। अस्पताल के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. अक्षय बत्रा ने बताया कि बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन के लिए ब्लड इरेडिएटर बेहद महत्वपूर्ण है। इसके जरिए खून में पाए जाने वाले टी सेल्स को निष्क्रिय करने में मदद मिलती है, जिससे ट्रांसप्लांट के मरीजों में रक्त जनित बीमारियों के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें