विश्व भोजपुरी संघ (वर्ल्ड भोजपुरी ऑर्गनाइजेशन-डब्ल्यूबीओ) की ओर से मंगलवार को जैन मंदिर मैदागिन में चिंतन सभा हुई। सभा में भोजपुरी के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जनजागरण अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। संघ ने सितंबर और अक्तूबर में मॉरीशस, रोड्रिग्स और रियूनियन में भोजपुरी भाषा संस्कृति बचाव महाजातरा आयोजित करने की घोषणा की। एक माह तक चलने वाली इस यात्रा में मारीशस की अंतरराष्ट्रीय प्रमुख (कला एवं संस्कृति) डॉ. हूशिला देवी रिसौल सहित विभिन्न देशों से आने वाले गणमान्य लोगों की सहभागिता रहेगी।
सभा की अध्यक्षता करते हुए विश्व भोजपुरी संघ के अंतरराष्ट्रीय महासचिव डॉ. अपूर्व नारायण तिवारी ने कहा कि गिरमिटिया मजदूरों के रूप में विभिन्न देशों में पहुंचे भारतीयों की आज कई देशों में महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी है। इसके बावजूद उनका जुड़ाव मातृभाषा भोजपुरी और पूर्वजों की सांस्कृतिक विरासत से कमजोर होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि फिजी, सूरीनाम, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, मारीशस, गुयाना, जमैका और दक्षिण अफ्रीका जैसे बहुसंख्यक गिरमिटिया आबादी वाले देशों में भोजपुरी भाषा और भोजपुरी संस्कृति का तेजी से अवमूल्यन हो रहा है, जो चिंताजनक है। इन देशों में भोजपुरी को राष्ट्रीय भाषाओं में स्थान मिलने के बावजूद उसकी स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। प्रवासी भारतीयों की नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा भोजपुरी को भूलकर विदेशी भाषाओं को अपनाती जा रही है।
रांची से आए डॉ. अजय ओझा ने सुझाव दिया कि भारत की अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी संस्थाओं को इन देशों में जाकर भोजपुरी भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए अभियान चलाना चाहिए। इस मौके पर डॉ. दिनेश सिंह, एसएन पांडेय, श्रीराम यादव, रतन जेटली, पं. राधिका रंजन तिवारी, काशीनाथ तिवारी, चैतन्य उपाध्याय, सुरेश कसेरा, श्यामलाल गुप्ता और शुभजीत साहा समेत अन्य मौजूद रहे।