बीएचयू अस्पताल के टीबी एंड चेस्ट डिपार्टमेंट के डॉ. दीपक शाह का कहना है कि ओपीडी में आने वाले 200 से 250 मरीजों में 60 से 70 मरीज अस्थमा वाले आते हैं। इसमें 30 से कम उम्र वालों की संख्या 15 से 20 के करीब रहती है। यह संख्या एक दो सालों में कुछ बढ़ी है। दो साल पहले तक यह संख्या 10 से 12 रहती थी। मरीजों को इस बीमारी से बचाव के प्रति जागरूक किया जाता है।
जांच के साथ ही मिल रही मरीजों की सही जानकारी
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शिवपुर में टीबी एंड चेस्ट विशेषज्ञ डॉ. अरुण यादव का कहना है कि अस्थमा के ज्यादातर मामले अनुवांशिक होते हैं। जांच का दायरा बढ़ने से मरीज भी सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्र पर रोजाना 12 से 15 लोग ऐसे आ रहे हैं, जिनकी उम्र 20 से 25 साल रहती है। ऐसे लोगों को समय से जांच कराने के साथ ही घर में अगर कोई अस्थमा का मरीज है तो डॉक्टर के संपर्क में बने रहने की सलाह दी जाती है।
ये बरतें सावधानी
- बाहर निकलें तो धूल, धुएं से बचाव के लिए मॉस्क का प्रयोग करें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा नहीं लेनी चाहिए।
- अगर घर में पहले से अस्थमा का कोई मरीज है तो सतर्कता बरतें।