भागती-दौड़ती जिंदगी में खान-पान और सेहत के प्रति ध्यान न देना कई तरह की बीमारियों की जड़ है। इन्ही में से एक है गठिया(आर्थराइटिस)। यह एक ऐसी बीमारी बन गई है, जिससे देश लगातार जूझ रहा है। हालांकि, चिकित्सा क्षेत्र में उन्नति से इस समस्या से ग्रसित लोगों को लाभ मिला है लेकिन आर्थराइटिस के विभिन्न रूपों के बारे में जानना बेहद जरूरी है।
अक्सर कभी हाथ तो कभी पैर की हड्डियों और जोड़ों में दर्द की शिकायत लेकर लोग अस्पताल की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इस बीमारी की चपेट में अब कम उम्र के बच्चे भी आते जा रहे हैं। चिकित्सक उसकी मुख्य वजह इलाज में देरी ही बताते हैं। बीएचयू अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों में अब 20 साल से कम उम्र वालों की संख्या बढ़ी है।
मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा, बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल की ओपीडी में हर दिन ऐसे 100 से 150 मरीज गठिया की शिकायत वाले पहुंच रहे हैं। बीएचयू मेडिसिन विभाग के चिकित्सक डॉ. अनूप सिंह का कहना है कि आर्थराइटिस की कोई उम्र नहीं होती है।
इसमें कुछ में तो अनुवांशिक तो कुछ की अनियमित जीवन शैली, खान-पान की कमी भी इसकी मुख्य वजह है। बताया कि 200 प्रकार के आर्थराइटिस की बीमारी होती है।अगर सही समय पर इलाज शुरू कर दिया जाए तो इससे बचा जा सकता है।