एड्स नियंत्रण के लिए जागरूकता रैली, व्याख्यान से लेकर तमाम कार्यक्रम हुए, लेकिन काम कुछ नहीं आया। काशी और आसपास के जिलों में पिछले साल के मुकाबले मरीज फिर बढ़ गए। इनमें पुरुष ही नहीं महिलाएं भी शामिल हैं, जिनका बीएचयू एआरटी सेंटर पर इलाज चल रहा है। पंजीकरण कराकर इलाज कराने वालों में 25 से 40 साल के मरीज ज्यादा हैं।
नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गनाइजेशन (नाको) और स्वास्थ्य विभाग की ओर से एड्स की रोकथाम के लिए हर साल समय-समय पर कई अभियान चलाए जाते हैं। जिला स्तर के एआरटी सेंटर पर पंजीकृत मरीजों की कॉउंसिलिंग, जांच और उपचार भी किया जाता है, बावजूद इसके मरीजों की संख्या कम नहीं हो रही है।
जिले में बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल और दीनदयाल अस्पताल में चल रहे सेंटर पर दर्ज आंकड़ों पर गौर करें तो बीएचयू में हर साल बनारस और आसपास के जिलों के साथ ही बिहार, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश आदि जगहों से औसतन 1000 से 1200 मरीज आ रहे हैं। दीनदयाल अस्पताल में चलने वाले एआरटी सेंटर पर भी हर साल 400 से 500 मरीजों का इलाज हो रहा है।
यूपी में हैं 38 एआरटी सेंटर
नाको की ओर से एड्स पीड़ितों की जांच, काउंसिलिंग, इलाज आदि के लिए यूपी में 38 एआरटी सेंटर खोले गए हैं। बनारस में दो, गाजीपुर, जौनपुर, मऊ, आजमगढ़, बलिया में 1-1 सेंटर हैं।
चार साल पहले तक पूर्वांचल में बनारस में ही सेंटर थे और आसपास के जिलों के मरीज भी यहीं आते थे। हर जिले में एआरटी सेंटर खोले जाने के बावजूद वाराणसी में पंजीकरण कराने वाले मरीजों में कुछ खास कमी नहीं आई है।
उधर, एड्स रोगियों में महिलाओं की संख्या भी कम नहीं है। बीएचयू एआरटी सेंटर पर 2017 में 976 मरीज पहुंचे। इनमें 605 पुरुष, जबकि 370 महिलाएं हैं। 2018 में अप्रैल से लेकर अब तक आए 900 मरीजों में 549 पुरुष और 300 महिलाएं हैं, जिनका इलाज किया जा रहा है।
आंकड़े एक नजर में
बीएचयू एआरटी सेंटर पर मरीज (अप्रैल से नवंबर तक)
2016- 1297
2017- 976
2018- 900
दीनदयाल एआरटी सेंटर के रोगी (अप्रैल से नवंबर तक)
2017- 294
2018- 394