जब लड़कियां पांचवीं और आठवीं तक की पढ़ाई भी बमुश्किल कर पाती थीं, उस दौर में एक बेटी ने कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए अपने सपनों में मनचाहे रंग भर दिए।
सर्जरी के क्षेत्र में देश की सर्वोच्च उपाधि ‘एमसीएच’ हासिल करने वाली देश की पहली महिला सर्जन, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी की पहली महिला कुलपति, आगरा मेडिकल कॉलेज की पहली छात्रा, जिसने जनरल सर्जरी में पढ़ाई की। नाम- पद्मश्री प्रो. सरोज चूड़ामणि गोपाल, जिन्होंने काशी ही नहीं पूरे देश में प्रतिष्ठा कमाई।
73 साल की उम्र की प्रो. गोपाल आज भी बतौर डिस्टिंग्विस्ड प्रोफेसर बीएचयू के मेडिकल छात्रों को पढ़ाती हैं और जोश-कर्मठता ऐसी कि आधे उम्र के लोग भी मात खा जाएं। प्रो. चूड़ामणि के उपलब्धियों भरे इस सफर के पीछे संघर्षों की लंबी दास्तान है। ये सफर उनके लिए कतई आसान नहीं था।
पहले तो उस दौर में किसी लड़की का मेडिकल क्षेत्र में कॅरियर बनाने का निर्णय, वह भी जनरल सर्जरी के क्षेत्र में। दूसरे, लड़कों के बीच अकेली छात्रा। प्रो. गोपाल बताती हैं कि डॉक्टर बनने का जुनून इस कदर था कि एमबीबीएस में एडमिशन के लिए पांच दिनों तक खाना-पीना छोड़ दिया।
फिर आगरा के मेडिकल कॉलेज में जनरल सर्जरी में दाखिला तो ले लिया लेकिन लड़कों के बीच अकेली लड़की होने की वजह से परेशानियां कदम-कदम पर थीं। लड़की होकर जनरल सर्जरी लेने पर प्रोफेसरों ने भी असहयोग ही किया लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
माता-पिता के सहयोग से हर बाधा पार करते हुए अपने सपने को पूरा किया। प्रो. गोपाल कहती हैं कि आज भी महिलाएं समानता के लिए लड़ रही हैं। पुरुष महिलाओं का आदर नहीं करते। बहुत हद तक परिवर्तन आया है लेकिन अभी और परिवर्तन की जरूरत है।