वाराणसी। घरेलू हिंसा और पारिवारिक विवाद जैसे मामलों में महिलाओं को न्याय के लिए बार-बार कोर्ट के चक्कर न लगाने पड़े। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य गीता विश्वकर्मा ने वन स्टॉप सेंटर के अधिकारियों और काउंसलरों को इस दिशा में निर्देशित किया है।
कहा कि महिलाओं की समस्याओं को पहले स्थानीय स्तर पर बातचीत और समझौते से सुलझाने की कोशिश की जाए। आयोग की सदस्य का कहना है कि कई बार मामूली पारिवारिक मतभेद या आर्थिक तकरार कानूनी लड़ाई का रूप ले लेती है। महिला समेत पूरा परिवार मानसिक और आर्थिक संकट में पड़ जाता है। ऐसे मामलों में प्रारंभिक स्तर पर बातचीत कर समाधान निकालना ही प्रभावी है।
गीता विश्वकर्मा ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि हर पीड़िता के साथ संवेदनशीलता से व्यवहार किया जाए और जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक परामर्श भी दिया जाए। घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न और अन्य छोटे-छोटे मामलों में महिला पुलिस, काउंसलर और समाजसेवी संगठनों की संयुक्त टीम बनाकर समन्वय से काम किया जाए ताकि किसी भी महिला को न्याय के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया का सामना न करना पड़े।