वाराणसी। बीएचयू के महिला अध्ययन एवं विकास केंद्र में आयोजित व्याख्यान में मुख्य वक्ता कथाकार शिवमूर्ति ने कहा कि स्त्रियां सामाजिक संघर्षों में मुखर हो रही हैं। उनको प्रकृति से संघर्षों की ताकत मिलती है। विश्वविद्यालय में समकालीन भारत में ग्रामीण स्त्री विषय पर आयोजित व्याख्यान में शिवमूर्ति ने कहा कि स्त्रियां समकालीन भारतीय ग्रामीण समाज में परिवर्तन की अगुवाई कर रही हैं। वे सभी प्रकार की सत्ता और उनके प्रतिबंधों के विरुद्ध प्रतिरोध कर रही हैं।
कथाकार शिवमूर्ति ने कसाईबाड़ा, तिरिया चरित्तर, कुच्ची का कानून जैसी अपनी कहानियों के आधार पर ग्रामीण स्त्रियों के जीवन की परिस्थितियों को समझाया। बताया कि उनकी कहानियों की मुख्य प्रेरणा ग्रामीण स्त्रियां रही हैं इसलिए उनके कथा साहित्य में स्त्रियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। व्याख्यान के बाद उन्होंने श्रोताओं, विद्यार्थियों और शिक्षकों के सवालों का भी जवाब दिया। मंच संयोजन कर रहीं डॉ. प्रियंका सोनकर ने कहा कि शिवमूर्ति की कहानियों में ग्रामीण स्त्रियों का सशक्त रूप व्यक्त हुआ है। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मीनाक्षी झा ने किया। कार्यक्रम में स्त्री अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. आशीष त्रिपाठी, प्रो. वशिष्ठ अनूप, प्रो. शशिकला त्रिपाठी, प्रो. डीके ओझा, प्रो. प्रमोद बागड़े, प्रो. प्रवेश भारद्वाज, प्रो. प्रशांत ठाकुर, प्रो. प्रभाकर सिंह आदि मौजूद रहे। ब्यूरो