वाराणसी। ‘हाथ-पैर में काफी दर्द हो रहा था लेकिन ठान लिया कि मुकदमा जरूर कराऊंगी। पढ़ी-लिखी हूं, चुप कैसे रहती।’ मलदहिया चौराहे के पास खुले नाले में सोमवार की सुबह गिरकर घायल अधिवक्ता अर्चना जायसवाल इसी भावना से अपनी चोट की परवाह न करते हुए अन्याय का प्रतिकार करने सिगरा थाने पहुंच गईं। ऐसे हादसे तो रोज होते हैं लेकिन कोई विरोध कहां दर्ज कराता है। पुलिस ने भी सोचा कि मामला टल जाए और टरकाने की कोशिश करती रही। लोगबाग भी समझाने में जुटे रहे लेकिन वे झुकने को तैयार न थीं। काफी हुज्जत के बाद पुलिस झुकी और नगर आयुक्त के खिलाफ दर्ज किया। इसके बाद महापौर हरकत में आए और चीफ इंजीनियर और जलकल महाप्रबंधक को खुले नाले और मैनहोल को अभियान चलाकर ढकने का निर्देश दिया। शाम को वे मैनहोल का निरीक्षण करने भी निकले।
कबीरचौरा क्षेत्र के नखास निवासी डॉ. भानु प्रकाश जायसवाल की पत्नी अर्चना सोमवार की सुबह 10 बजे के करीब स्कूटी से बीएचयू अस्पताल जा रही थीं। जैसे ही वह मलदहिया चौराहे से बाईं ओर फातमान रोड की तरफ मुड़ीं सड़क के किनारे नाले का ढक्कन हटा देख कर अचकचा गईं। अनियंत्रित हो जाने के कारण स्कूटी दूर छिटक गई और वे नाले में गिर गईं। पास की दूकान में काम कर रहा दीपू व राहगीर
दौड़कर नाले के पास पहुंचे और उन्हें बाहर निकाला, अन्यथा उनकी जान जा सकती थी। हाथ-पांव में काफी चोटें आईं और डेढ़ तोला की सोने की चेन नाली में बह गई। उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम (100 नंबर) को फोन किया लेकिन कोई मौके पर नहीं पहुंचा। चौराहे पर मौजूद लोग उन्हें पुलिस के लफड़े में नहीं पड़ने की सलाह देते रहे लेकिन अर्चना ने मन की सुनी और नगर निगम की मनमाने के खिलाफ
आवाज उठाने की ठान ली। सिगरा थाना पहुंचीं और लापरवाही के लिए नगर आयुक्त के खिलाफ तहरीर दी। पहले तो पुलिस मुकदमा दर्ज करने को तैयार ही नहीं थी लेकिन दो घंटे बहस के बाद दोपहर एक बजे पुलिस ने नगर आयुक्त के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 427 के तहत मामला दर्ज किया और अर्चना को मेडिकल मुआयना के लिए कबीरचौरा अस्पताल भेजा।