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महिलाओं में गहराता जा रहा है यौन उत्पीड़न का डर

Thu, 11 Dec 2014 02:20 AM IST
varanasi
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घर से बाहर निकलते ही महिलाओं में भय घर करने लगता है। यह डर अनायास ही नहीं है। घरेलू हिंसा, घर के बाहर सड़क पर छींटाकशी, छेड़खानी के चलते यह दिन पर दिन यह गहरा होता जा रहा है। रोजाना महिलाओं के साथ होने वाली यौन हिंसा की खबरें उनके अवचेतन मन में इस भय को और गहरा कर रही हैं। शहर के सामाजिक संगठनों के विश्लेषण में यह बात सामने आई है।
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अमर उजाला के लिए हंसा रिसर्च की ओर से किए गए सर्वे में यह बात सामने आई है कि 35 प्रतिशत महिलाओं को यौन उत्पीड़न का डर हमेशा सताता रहता है जबकि 85 प्रतिशत के मन में छेड़छाड़ की आशंका बनी रहती है। शहर में 22 फीसदी लोगों को लगता है कि दिन में भी घर से बाहर महिलाओं का निकलना सुरक्षित नहीं है जबकि रात में यह डर 54 प्रतिशत लोगों को सताने लगता है।

मानवाधिकार एवं जन निगरानी समिति की श्रुति का कहना है कि मंगलवार को ही लल्लापुरा में दुकान पर सौदा खरीदने गई एक लड़की से लोगों ने छेड़खानी की। इस तरह की घटनाएं आए दिन होती हैं। ऐसे मामले में लोक लाज से चुप लगा जाने पर छेड़खानी करने वालों के हौसले बढ़ते जाते हैं और कई बार स्थिति भयावह हो जाताी है।
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 इन कारणों से हर महिला के अवचेतन मन में बसा है। अपने साथी के साथ किसी गाड़ी में जाने में भी डर लगता है। टैक्सी शेयर करना हो तो यह और बढ़ जाता है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव समाज में कम हुआ है। अब लोग बस या ट्रेन में अपनी सीट छोड़कर उठना नहीं चाहते हैं।

लोग अपनी लड़कियों को स्कूल के अलावा कोचिंग आदि में भेजना नहीं चाहते हैं। महिला संगठन सार्क की रंजना गौड़ का कहना है कि बनारस में सार्वजनिक परिवहन सुविधा का हाल ठीक नहीं होने के कारण दिन में महिलाएं घर से बाहर निकल भी जाएं लेकिन सूरज ढलने के बाद घर से बाहर निकलना संभव नहीं हो पाता है।

 महिला अपराधों को लेकर पुलिस गंभीर: एसएसपी
महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों को लेकर पुलिस बेहद संजीदा है। बड़ागांव क्षेत्र में गैंगरेप की घटना में आरोपियों पर रासुका तक लगाया गया। आधा दर्जन दुष्कर्म के आरोपियों पर गैंगेस्टर लगाया गया है। छेड़छाड़ के 55 आरोपियों के खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्रवाई की गई है। थानेदारों को पीडि़त महिला की सहायता के लिए एनजीओ एवं अधिवक्ता को बुलाने, तत्काल चिकित्सीय परीक्षण कराने, धारा 161 के तहत महिला पुलिस अधिकारी के जरिए बयान दर्ज कराने और उसकी वीडियोग्राफी कराने का निर्देश दिया गया है।
जोगेंद्र कुमार, एसएसपी
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  आयोग के पास सबसे ज्यादा मामले घरेलू हिंसा और उसके बाद यौन उत्पीड़न की शिकायतें आती हैं। बनारस में अपहरण की शिकायतें भी आ रही हैं। पिछले दो साल में ऐसी तीन शिकायतें आयोग के पास आईं। एक मामले में तो बकायदा धमकी देने के बाद उनकी बेटी को अगवा किया गया।
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सुमन यादव, उपाध्यक्ष, राज्य महिला आयोग  
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