चादर की ओट में प्रसव
बताया जा रहा है कि अस्पताल पहुंचने के बाद अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने उसे भर्ती लेने से मना कर दिया। परिजन उसे लेकर निकल ही रहे थे कि इस बीच अस्पताल के सामने ही उसकी प्रसव पीड़ा तेज हो गई और परिजनों ने आनन-फानन में सड़क के किनारे ही चादर की ओट के पीछे रानी का प्रसव कराया। अस्पताल में भर्ती न लेने को लेकर परिजन आक्रोशित हो उठे।
प्रसूता के भाई विजय कुमार ने आरोप लगाया कि अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स नीलम मौर्या ने 'मुसहर' होने का हवाला देते हुए प्रसव से इनकार कर दिया था। इधर सड़क पर सड़क पर प्रसव होने की जानकारी होते ही स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई। सूचना मिलते ही सीएमओ डॉ. एसके चक मौके पर पहुंचे।
पता चला कि परिजन प्रसूता को लेकर घर चले गए हैं। वे तत्काल टीम के साथ घर पहुंचे और जच्चा और बच्चा को लेकर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने इमरजेंसी वार्ड में प्रसूता व बच्चे को भर्ती कराने के साथ-साथ उन्हें उचित उपचार दिए जाने का निर्देश दिया। इस बीच पुलिस व प्रधान रमेश चंद यादव ने परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराए। वहीं सीएमओ डॉ. अजय तिवारी ने स्वास्थ्यकर्मियों को प्रसूता की 24 घंटे निगरानी के निर्देश दिए।
पढ़े-लिखे न होने के कारण नहीं कर सके एबुलेंस से संपर्क
सीएमओ डॉ. एसके चक ने प्रसूता सोमवार को भी जिला अस्पताल आई थी और जांच के दौरान उसका हीमोग्लोबिन पांच ग्राम था, जिसके कारण उसे मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल रेफर कर दिया गया था। महिला मिर्जापुर गई थी, लेकिन वहां से लौट आई और मंगलवार को रात फिर ज्ञानपुर जिला अस्पताल आई। इस दौरान स्टाफ नर्स और डाक्टर ने देखा लेकिन हीमोग्लोबिन पांच ग्राम होने के कारण उसे बीएचयू रेफर कर दिया गया।
महिला, उसके परिजन पढ़े-लिखे नहीं थे। जिसके कारण वो 102 एंबुलेंस से संपर्क नहीं कर सके और अस्पताल से लौटने लगे। इस दौरान सड़क पर उसका प्रसव हो गया। महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उसे प्लाज्मा चढ़ाया जा रहा है। इस पूरे मामले की जांच 24 घंटे में पूरी हो जाएगी। इसमें जो दोषी होगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्यकर्मियों को उसकी मदद कर एबुलेंस मंगाकर उसे बैठाना चाहिए था।
बाद में जो मिली सुविधाएं वह पहले क्यों नहीं?
जिला अस्पताल के ठीक सामने सड़क पर प्रसव होता देख, लोगों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया। कहा कि प्रसव होने के बाद प्रसूता अपने बच्चे को लेकर घर चली गई। सीएमओ ने दोनों को घर से लाकर अस्पताल में भर्ती कराया। लोगों ने आक्रोश जताया कि अस्पताल कर्मियों ने जिस तरह से संवेदनहीनता का परिचय दिया। यह कहीं से भी स्वीकार्य नहीं है। सड़क पर यह पूरा मामला करीब 20 से 25 मिनट तक चला।
इस बीच, कोई स्वास्थ्यकर्मी बाहर क्यों नहीं आया और उसे अस्पताल में क्यों नहीं ले गया। इसके अलावा 24 घंटे इमरजेंसी सेवा वाली लेबर रूम का ताला भी बंद मिला था। प्रसव के बाद पीड़िता को अस्पताल में भर्ती कराया गया और हीमोग्लोबीन लेबल 10 से 11 होने के बाद ही छोड़े जाने का निर्देश दिया गया। जो सुविधाएं बाद में मिल रही है। वह उसे प्रसव पीड़ा के दौरान ही मिलना चाहिए।
मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय टीम बनाई गई। जिसमें एसीएमओ डॉ. ओपी शुक्ला, डिप्टी सीएमओ डॉ. आशीष सरोज, भदोही सीएचसी की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी पाठक व एक अन्य हैं। जांच में जो भी दोषी मिलेगा। उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। महिला व बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वे 24 घंटे चिकित्सकों की निगरानी में हैं और दोनों स्वस्थ्य है। - डॉ. एसके चक, सीएमओ।
अस्पताल के सामने सड़क पर प्रसव होना गंभीर मामला है। मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट मांगी गई है। इस मामले में जो भी दोषी होगा। उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - शैलेश कुमार, डीएम।