Varanasi News: जंक फूड पसंद करने वाली युवतियों और महिलाओं के लिए जरूरी खबर है। इसकी बढ़ती आदत महिलाओं के सेहत पर काफी असर पड़ रहा है। इससे बांझपन, अनचाहे बाल और भारी आवाज जैसी समस्याएं हो रही हैं।
तेजी से बदलती जीवनशैली और जंक फूड की बढ़ती आदत से बांझपन की समस्या हो रही है। इसका असर महिलाओं की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। इससे माहवारी अनियमित होने के साथ ही शरीर पर बाल ज्यादा आ रहे हैं। उनकी आवाज भी भारी हो रही है। इस तरह की समस्या लेकर रोजाना करीब 20 से 25 महिलाएं जिला महिला अस्पताल पहुंच रही हैं। यहां डॉक्टर उनको जीवनशैली में सुधार लाने के साथ ही सेहत पर विशेष ध्यान देने की सलाह दे रही हैं।
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जिला महिला अस्पताल में वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. वीपी द्विवेदी ने बताया कि किशोरियों से लेकर युवतियों और प्रौढ़ महिलाओं में अनियमित माहवारी की समस्या बढ़ रही है। इसकी वजह पौष्टिक भोजन छोड़ पिज्जा, बर्गर, नूडल्स और कोल्ड ड्रिंक का ज्यादा सेवन है।
महिलाओं की जांच रिपोर्ट में सामने आ रहा है कि रिफाइंड शुगर, अत्यधिक वसा और प्रोसेस्ड कार्बोहाइड्रेट उनके शरीर के हार्मोन के संतुलन को प्रभावित कर रहे हैं। इसकी वजह से किशोरियों के चेहरे पर असामान्य रूप से बाल उगने लगते हैं। आवाज भारी होने लगती है और माहवारी का चक्र बिगड़ जाता है। शुरुआत में इन लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन समय के साथ समस्या गंभीर रूप ले लेती है।
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हार्मोनल असंतुलन, खून की कमी की भी हो रही समस्या
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- फोटो : Adobe Stock
डॉ. वीपी द्विवेदी के अनुसार जंकफूड के अधिक सेवन से हार्मोनल असंतुलन होना आम हो गया है। इस वजह से कई महिलाओं में बांझपन जैसी समस्या भी हो रही है। असंतुलन की वजह से अंडाशय में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं। ये सिस्ट अपरिपक्व अंडों के कारण होते हैं। इससे ओव्यूलेशन प्रभावित होता है। इसी वजह से मुंहासे, चेहरे पर अनचाहे बाल और आगे चलकर गर्भधारण में परेशानी यानी बांझपन की समस्या सामने आती है। इसके अलावा किशोरियों और युवतियों में एनीमिया के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। इसकी प्रमुख वजह असंतुलित आहार है। पिज्जा, बर्गर, चिप्स और इंस्टेंट फूड पेट तो भर देते हैं, लेकिन शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं दे पाते। इनमें आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी-12 जैसे तत्व लगभग नहीं होते, जबकि ये खून बनने के लिए जरूरी हैं।
महिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अलका सिंह ने बताया कि 200 महिलाओं की ओपीडी में करीब 20-25 महिलाओं में ये समस्या देखने को मिल रही है। महिलाओं में एनीमिया की समस्या भी ज्यादा हो रही है। उन्हें इंजेक्शन या दवा लेने को कहा जाता है, लेकिन वे दोबारा आती ही नहीं। ज्यादातर महिलाएं इसे नजरअंदाज करती हैं। इस वजह से आगे चलकर यह गंभीर समस्या बन जा रही है। डॉ. सिंह ने बताया कि सही जीवनशैली अपनाकर इन समस्याओं से काफी हद तक बचाव संभव है। उन्होंने कहा कि संतुलित और पौष्टिक आहार से एनीमिया और हार्मोनल गड़बड़ी को नियंत्रित किया जा सकता है।
युवतियों और महिलाओं को अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, चुकंदर, अनार, सेब, गुड़, दालें, अंकुरित अनाज, दूध को आवश्यक रूप से शामिल करना चाहिए। आयरन के बेहतर अवशोषण के लिए विटामिन-सी युक्त फल जैसे- नींबू, आंवला और संतरा का सेवन बहुत जरूरी है। समय-समय पर खून की जांच कराने पर जोर दिया जाए।