बताया गया कि 16 मार्च को प्रसव पीड़ा होने पर महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नरपतपुर या नजदीकी पीएचसी में संस्थागत प्रसव के लिए ले जाने के बजाय आशा कार्यकर्ता उसे डुबकियां बाजार स्थित रिटायर्ड एएनएम के निजी आवास पर ले गई। वहीं, दोनों ने मिलकर असुरक्षित और अकुशल तरीके से डिलीवरी कराई।
डिलीवरी के कुछ ही समय बाद प्रसूता को अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। स्थिति गंभीर होने के बावजूद उसे किसी कुशल चिकित्सक या अस्पताल में भर्ती नहीं कराया गया, बल्कि स्वयं ही इलाज करने का प्रयास किया गया। समय पर उचित उपचार न मिलने के कारण कुछ ही घंटों में प्रसूता की मौत हो गई। हालांकि, नवजात बच्ची पूरी तरह सुरक्षित बताई जा रही है।
पीएचसी प्रभारी डॉ. मनोज कुमार वर्मा ने बताया कि गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी डेथ के ऑडिट के दौरान यह मामला सामने आया। जांच में जिस स्थान पर प्रसव कराया गया, वहां भारी गंदगी, टूटा हुआ बेड और गंदे चादर मिले, जो लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण हैं।
पूरे प्रकरण में आशा कार्यकर्त्री और रिटायर्ड एएनएम की मिलीभगत सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आशा कार्यकर्त्री के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही विस्तृत रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित प्रसव व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।