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वाराणसी में महिलाओं-दलितों से संबंधित अपराध बढ़े, गंभीर आपराधिक वारदातों में आई कमी

Thu, 27 Dec 2018 11:57 AM IST
shashikant misra पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी,अमर उजाला,वाराणसी
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वाराणसी जिले में गंभीर आपराधिक वारदातों में वर्ष 2016 और 2017 की तुलना में 2018 में कमी दर्ज की गई है। वहीं, महिला उत्पीड़न, दहेज हत्या, चेन स्नेचिंग और दलित उत्पीड़न से जुड़े अपराधों के साथ चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने में जिले की पुलिस असफल रही।
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नतीजतन, इन प्रकरणों से जुड़े अपराध बढ़ते गए और बीते दो वर्षों की अपेक्षा मौजूदा साल में ज्यादा मुकदमे दर्ज किए गए। एक जनवरी से 30 नवंबर 2018 तक के पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, जिले के थानों में महिला उत्पीड़न से जुड़े 490 मामले दर्ज किए गए। इसी अवधि में 2017 में 485 और 2016 में 286 प्रकरण दर्ज किए गए थे।

एक जनवरी से 30 नवंबर के बीच 2017 में जिले में दलितों से संबंधित 438 और 2016 में 315 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि वर्ष 2018 में अब तक 478 प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं। इसी तरह एक जनवरी से 30 नवंबर के बीच 2017 में जिले में दहेज हत्या के 18 और 2016 में 30 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2018 में इस अंतराल में 33 मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
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वाहन चोरी की बात करें तो 2017 में जिले में इस समयांतर में 618 और 2016 में 566 प्रकरण दर्ज किए गए, जबकि 2018 में इस अवधि में 646 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। चेन स्नेचिंग के 2018 में एक जनवरी से 30 नवंबर के बीच 43 मुकदमे दर्ज किए गए, जबकि इसी अवधि में 2017 में 42 और 2016 में 25 प्रकरण दर्ज किए गए थे।

घरों व दुकानों में चोरी का आंकड़ा भी बीते दो वर्षों से इस वर्ष ज्यादा है और 1000 के पार पहुंच चुका है। यह स्थिति जिले की कानून व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है, लेकिन पुलिस इस संबंध में कोई प्रभावी कदम उठाते नहीं दिख रही है।
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निरोधात्मक कार्रवाई में आई कमी

निरोधात्मक कार्रवाई में भी पिछले दो वर्षों की अपेक्षा 2018 में पुलिस ने कमी की। 2018 में एक जनवरी से 30 नवंबर के बीच शस्त्र अधिनियम के तहत 223 प्रकरण दर्ज किए गए, जबकि इसी अवधि में 2017 में 231 और 2016 में 270 मामलों में कार्रवाई हुई थी।

जुआ अधिनियम के तहत एक जनवरी से 30 नवंबर के बीच 77 मामले दर्ज किए गए, जबकि इसी अवधि में 2017 में 120 और 2016 में 124 मामलों में कार्रवाई हुई थी। आबकारी अधिनियम के तहत 2018 में एक जनवरी से 30 नवंबर तक 269 पर कार्रवाई की गई जबकि इसी अवधि में 2017 में 372 और 2016 में 467 पर कार्रवाई की गई थी।

गोवध अधिनियम के तहत 2018 में एक जनवरी से 30 नवंबर तक 39 पर कार्रवाई की गई जबकि इसी अवधि में 2017 में 59 और 2016 में 71 पर कार्रवाई की गई थी। इसी तरीके से गुंडा एक्ट, गैंगेस्टर एक्ट, आईटी एक्ट सहित अन्य मामलों में भी निरोधात्मक कार्रवाई में कमी दर्ज की गई।
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