काशी के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने के तमाम प्रयासों के बावजूद हालात चौंकाने वाले हैं। दलालों, विभागीय मुलाजिमों की मिलीभगत से मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ रही है। जो सेवाएं पूरी तरह निःशुल्क हैं, उनके लिए भी सामान्य तौर पर डेढ़ से दो हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
यह खुलासा शासन और विभागीय उच्चाधिकारियों के यहां पहुंची शिकायतों के बाद हुआ है। ऐसी 35 शिकायतों की जांच शुरू करा दी गई है। पिछले गुरुवार को अपर निदेशक के निर्देश पर इनमें महिला अस्पताल से जुड़ी शिकायतों की जांच हुई थी। कर्मचारियों से पूछताछ के बावजूद हालांकि कोई स्पष्ट तथ्य सामने नहीं आए।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक यह हाल तब है जब अधिकतर मरीज और उनके परिवारीजन जागरूकता की कमी के चलते अस्पतालों में धन उगाही की शिकायत ही नहीं करते। बात पीएचसी, सीएचसी की हो या जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और मंडलीय अस्पताल की। ऐसी शिकायतें सामने आती रहती हैं।
हालांकि अब धनउगाही की शिकायतों पर शासन और विभागीय उच्चाधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाया है। अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाने के साथ ही ये सूचनाएं बहुतायत चस्पा करा दी गई हैं कि मरीज किसी को पैसे न दें। यदि कोई दबाव बनाए तो तत्काल उसकी शिकायत करें।
महिला अस्पतालों पर होगी कैमरे की नजर
धनउगाही और अभद्रता की शिकायतों के मद्देनजर अब महिला अस्पताल में भी सीसी टीवी कैमरे लगाए जाएंगे। मंडलीय अस्पताल को सीसी कैमरों से पहले ही लैैस किया जा चुका है। एसआईसी डॉ. शैला त्रिपाठी ने बताया कि प्रस्ताव पास हो चुका है। जल्द से जल्द सीसी कैमरे लगवाए जाएंगे।