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Varanasi News: 44 लाख की आबादी पर महज 200 डॉक्टर, रेफरल सिस्टम के भरोसे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था

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- 13 सीएचसी, 44 पीएचसी, दो जिला अस्पताल और मंडलीय अस्पताल के बावजूद विशेषज्ञ चिकित्सकों का संकट
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- कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन, रेडियोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया और गैस्ट्रो विशेषज्ञों की कमी से जटिल मरीज सीधे बीएचयू पर निर्भर
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। जिले सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर विशेषज्ञ चिकित्सक संकट से जूझ रही है। बीएचयू अस्पताल को छोड़ दिया जाए तो 44 लाख की आबादी वाले जिले में जिला, मंडलीय, सीएचसी और पीएचसी स्तर के सरकारी अस्पतालों में लगभग सिर्फ 200 डॉक्टर हैं। हालात ऐसे हैं कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर मंडलीय अस्पताल तक मरीजों को इलाज से ज्यादा रेफर मिलने की व्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर पूरे पूर्वांचल और बिहार के मरीजों का सबसे बड़ा सहारा बीएचयू भी 175 डॉक्टरों के रिक्त पदों से जूझ रहा है। बीएचयू में करीब एक हजार डॉक्टर हैं।
जिले में 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), 44 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), दो जिला अस्पताल, एक महिला अस्पताल और एक मंडलीय अस्पताल हैं। इसके बावजूद विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। करीब 44 लाख की आबादी वाले जिले में इन सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की संख्या लगभग 200 बताई जा रही है। वहीं, बीएचयू में करीब 1000 हजार से अधिक डॉक्टर हैं लेकिन यहां जिले के अलावा पूरे पूर्वांचल और बिहार के मरीज भी रोजाना पहुंचते हैं। बीएचयू की ओपीडी रोजाना आठ हजार की होती है। इतनी बड़ी आबादी के मुकाबले यह संख्या बेहद कम मानी जा रही है। इसका सीधा असर मरीजों की चिकित्सा सेवाओं पर पड़ रहा है।
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विशेषज्ञ डॉक्टरों का सबसे बड़ा संकट
जिले के सरकारी अस्पतालों में कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन, रेडियोलॉजिस्ट और एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की कमी बनी हुई है। कई अस्पतालों में जटिल ऑपरेशन केवल विशेषज्ञ चिकित्सकों की अनुपलब्धता के कारण नहीं हो पाते। रेडियोलॉजिस्ट न होने से जांच रिपोर्ट में देरी होती है, जबकि एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की कमी ऑपरेशन सेवाओं को प्रभावित कर रही है।

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इलाज नहीं, सिर्फ रेफरल का सिलसिला
स्वास्थ्य व्यवस्था में सबसे बड़ी समस्या लगातार रेफरल की है। मरीज पहले पीएचसी पहुंचते हैं। वहां से सीएचसी भेज दिए जाते हैं। सीएचसी से जिला अस्पताल, फिर मंडलीय अस्पताल और अंततः बीएचयू रेफर कर दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में कई गंभीर मरीजों का इलाज शुरू होने में ही काफी समय निकल जाता है। कई बार मरीज और उनके परिजन आर्थिक और मानसिक रूप से भी टूट जाते हैं।
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पूरे पूर्वांचल का बोझ अकेले बीएचयू पर
वाराणसी का बीएचयू अस्पताल केवल जिले तक सीमित नहीं है। यहां पूर्वांचल के लगभग सभी जिलों के अलावा बिहार से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। बीएचयू में लगभग एक हजार डॉक्टर कार्यरत हैं, लेकिन यहां भी विशेषज्ञ डॉक्टरों के 175 पद रिक्त हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार एनेस्थीसिया के 18, सर्जरी के 15, मेडिसिन के 17, कार्डियोलॉजी के 5, नेफ्रोलॉजी के 5 और न्यूरोसर्जरी, बाल रोग और पैथोलॉजी में 7-7 पद खाली हैं। इन रिक्तियों का असर ओपीडी से लेकर ऑपरेशन और गंभीर मरीजों के इलाज तक दिखाई देता है।
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