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काशी के कायाकल्प की उम्मीदों को लगे पंख

Wed, 05 Apr 2017 01:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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काशी - फोटो : OnlinePrasad.com
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प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में लंबे समय से ठहरीं प्राथमिकता वाली योजनाओं की रुकावटें दूर करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। मंगलवार को सरकार की पहली कैबिनेट मीटिंग से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना और पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी और वाराणसी के मंडलायुक्त के साथ बैठक कर वाराणसी में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी ली। चल रहे कामों की गति तेज करने की हिदायत देकर वाराणसी को लेकर अपनी संजीदगी व्यक्त कर दी। समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री का रुख भांपते हुए अधिकारी वाराणसी को स्मार्ट सिटी बनाने और यहां आवागमन के साधन बढाने से लेकर स्वच्छता की मुहिम को परवान चढ़ाने में जुट गए हैं।
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सीएम ने पर्यटन विभाग की परियोजनाओं को भी जल्द पूरा करने पर जोर दिया। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास भव्य एवं खुला माहौल उपलब्ध कराने के लिए जरूरी कदम उठाने के भी निर्देश देकर   बनारस के धार्मिक महत्व का ध्यान रखा। अधूरे फ्लाईओवर को जल्द पूरा कराने के साथ ही जाम से मुक्ति दिलाने के लिए पीपीडी मॉडल पर मल्टी लेबल पार्किंग बनाने को हरी झंडी दे दी गई। 17702 करोड़ की लागत से प्रस्तावित दो कॉरिडोर की मेट्रो रेल परियोजना पर मंथन किए जाने से जाहिर है कि स्थानीय लोगों के साथ-साथ देशी-विदेशी पर्यटक आने वाले कुछ वर्ष में मेट्रो से काशी दर्शन कर सकेंगे। 
 मुख्यमंत्री ने वाराणसी की संकरी और भीड़ भरी गलियों को देखते हुए वहां पर्याप्त संख्या में मल्टी लेवल पार्किंग बनाने के निर्देश दिए। प्रथम चरण मे एक पार्किंग नगर निगम और दूसरी पीडब्ल्यूडी बनाएगा। वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) द्वारा 1948.57 लाख रुपये से 2517 वर्ग मीटर में दो मल्टी लेवल पार्किंग बनाने का प्रस्ताव किया था। इसके साथ ही पीपीपी मॉडल पर पार्किंग बनाने के लिए मंडलायुक्त को अधिकृत किया गया है। उन्होंने 59 किमी लंबे पंचकोसी मार्ग पर विशेष ध्यान देने का निर्देश देते हुए कहा कि 2 लेन की सड़क पगडंडी समेत बनाने के लिए 15 दिन में लोक निर्माण विभाग डीपीआर तैयार कराए। इस पंचकोसी मार्ग पर जगह-जगह बैठने और प्रसाधन की व्यवस्था भी प्रस्तावित करने के लिए कहा गया है। वर्षों से लंबित ट्रांसपोर्ट नगर की अधूरी परियोजना को पूरा कराने के लिए भी डीपीआर तैयार कराने के निर्देश दिए। इस परियोजना को पूरा करने के लिए केंद्रीय परिवहन मंत्रालय की मदद ली जाएगी।
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सीएम योगी आदित्यनाथ ने नगर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए चौका घाट और मंडुवाडीह के निर्माणाधीन सेतुओं का काम 30 जून तक पूरा कराने के निर्देश सेतु निगम के अफसरों को दिए। अपर मुख्य सचिव लोक निर्माण विभाग से कहा गया कि वे खुद वाराणसी जाकर लोक निर्माण विभाग और सेतु निगम से संबंधित परियोजनाओं का निरीक्षण करें। मंडुआडीह में निर्माणाधीन आरओबी को पूरा कराने के लिए सीवर लाइन हटाने के लिए तत्काल 90 लाख रुपये अवमुक्त करने के निर्देश दिए। मंडलायुक्त को रेलवे के अधिकारियों से बात कर 30 जून तक आरओबी का काम पूरा कराने के लिए कहा। इसी तरह चौका घाट से लहरतारा को जोड़ने के लिए निर्माणाधीन 1710 मीटर के फ्लाईओवर का काम मार्च, 2018 तक पूरा करने का निर्देश दिया।


नगर की यातायात व्यवस्था को और अधिक बेहतर बनाने के लिए शिवपुर-लहरतारा-फुलवरिया तक करीब साढ़े पांच किमी फोरलेन सड़क बनाने और वरुणा नदी के कोनिया घाट पर पुल बनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी। इसके साथ ही लोक निर्माण विभाग की सभी सड़कों पर डिवाइडर बनाने और उन पर सर्फेसिंग लेयर के लिए 88 करोड़ रुपये की परियोजना को भी मंजूरी दी। नगरों की सड़कों को खोद कर उनको छोड़ देने की प्रवृत्ति पर भी नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर की सड़कों पर कवर्ड नाली की ऐसी व्यवस्था की जाए कि संस्थाओं द्वारा सड़कों को खोदने के बजाय एक निश्चित किराया नगर निगमों को देकर निर्मित नाली में अपने पाइप या तार डालकर काम आगे बढ़ा सकें।
  

 सीएम ने ‘नमामि गंगे परियोजना’ के तहत संचालित परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए निर्माणाधीन गोइठहां और दीनापुर परियोजनाओं के साथ-साथ रमना परियोजना को भी शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए। इन तीनों परियोजनाओं के पूरा हो जाने पर वाराणसी में 411 एमएलडी क्षमता की एसटीपी काम करने लगेंगी, जो वर्ष 2035 तक की जरूरतों को पूरा कर सकेंगी। इसके अलावा रेलवे ट्रैक के आसपास खुले में शौच की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए योगी ने मंडलायुक्त से कहा कि कुछ ऐसे मल्टी स्टोरी भवन तैयार कराने के प्रस्ताव पर विचार किया जाए, जिसमें रेलवे ट्रैकके पास झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को बसाया जा सके। वाराणसी जिले को 2 अक्तूबर तक खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) करने की परियोजना पर गंभीरता से काम करने के निर्देश भी दिए।  


मुख्यमंत्री ने पेयजल आपूर्ति की समस्या को गंभीरता से लेते हुए जेएनएनयूआरएम के तहत जल निगम द्वारा कराए गए कार्यों की जांच टीएसी से कराने के निर्देश दिए। बैठक में मंडलायुक्त ने बताया कि जल निगम ने योजना के तहत 23 ओवरहेड टैंक बनाए हैं। इनको जोड़ने के लिए फीडर लाइन का ठीक से निर्माण किए बिना ब्रांचेज लाइन तैयार कर दीं। करीब 500 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद विभाग की इस योजना का लाभ वाराणसी शहर को नहीं मिल पा रहा है। इस पर नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री ने नगर विकास विभाग को टीएसी से जांच कराने का निर्देश दिया गया।


मुख्यमंत्री ने मंडलायुक्त से कहा कि लखनऊ में नगर निगम द्वारा स्थापित किए गए कान्हा उपवन की तरह वाराणसी में भी गौशाला की व्यवस्था की जाए। शहर के छुट्टा जानवरों के साथ-साथ गोवंश को रखने की वहां सहूलियत मिले। वाराणसी शहर में बिजली के तारों की अंडरग्राउंड केबलिंग परियोजना के संबंध में जानकारी लेते हुए उन्होंने इस काम में तेजी लाते हुए सितंबर तक परियोजना पूरी करने के निर्देश दिए।
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