प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने विरोधियों का सियासी तिलिस्म तोड़ने दो दिवसीय दौरे पर 25 मई को वाराणसी आएंगे। इस बार भी पीएम अपने मतदाताओं को करोड़ों रुपये की योजनाओं की सौगात देंगे। साथ ही पार्टी के बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। मुलाकात का समय और स्थान फिलहाल तय नहीं है मगर भाजपा से जुड़े सूत्र बता रहे हैं कि पीएम डीरेका में भाजपा कैडर से गुफ्तगू करेंगे। इस मुलाकात का मकसद भाजपा के ‘मिशन यूपी’ के बाबत संगठन की तैयारी देखना है।
पीएम 25 मई को दोपहर बाद आएंगे और 26 को सुबह रवाना होने से पहले वाराणसी के विकास से जुड़ी दो-तीन बड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। इसमें रिंग रोड और गंगा में जल परिवहन की करोड़ों रुपये की परियोजनाएं शामिल है। भाजपा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पीएम खादी ग्रामोद्योग आयोग से जुड़ी बड़ी परियोजना की नींव भी रख सकते हैं। हालांकि संबंधित विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने प्रस्ताव बनाकर केंद्र सरकार को भेजा है मगर फिलहाल उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि पीएम अगले दौरे में उनके प्रस्ताव को मूर्त रूप देंगे।
इस साल यह चौथा मौका होगा जब मोदी अपने मतदाताओं से मुखातिब होंगे। वे वोटरों को अपनी सरकार के दो साल के कामकाज का ब्योरा देने के साथ ही वाराणसी में कराए गए विकास कार्यों की भी जानकारी देंगे। बतौर सांसद मोदी ने यहां आराजीलाइन ब्लॉक के दो गांवों जयापुर और नागेपुर को गोद लिया है। अपने दो दिवसीय दौरे में वे इन दोनों गांवों के प्रधानों से मुलाकात कर गांव में हुए विकास कार्यों की जानकारी लेंगे।
वरुणा कॉरिडोर योजना में आई तेजी से बढ़ी चिंता
महीने भर के अंदर दूसरी बार प्रधानमंत्री का अपने संसदीय क्षेत्र का रुख करना बेसबब नहीं है। जिस तरह से प्रदेश सरकार वरुणा कॉरिडोर को मूर्त रूप देने में जुटी है, उससे केंद्र सरकार दबाव में है। गंगा निर्मलीकरण का उसका अभियान दो साल में गति नहीं पकड़ सका है। विरोधी भी अब नमामि गंगे अभियान पर चुटकी लेने से बाज नहीं आ रहे। गंगा के मुद्दे पर भाजपा भी बैकफुट नजर आ रही है। ऐसे में विरोधियों को माकूल जवाब देने का पीएम ने खुद बीड़ा उठाया है।
बिहार विधानसभा चुनाव में मिली हार के सदमे से भाजपा अभी उबर नहीं पाई है। अब यूपी में चुनाव से पहले महागठबंधन की सुगबुगाहट से थिंक टैंक की चिंता बढ़ गई है। पीएम के गढ़ में राजनीतिक कार्यकर्ता सम्मेलन के बहाने यूपी चुनाव की जमीन तैयार करने की जदयू की कोशिशों को भी भाजपा गंभीरता से ले रही है। उसे लग रहा है कि बिहार के बाद अब यूपी में भी सारे विरोधी एकजुट हो रहे हैं। हालांकि सपा और बसपा के महागठबंधन से दूर रहने से उसे थोड़ी राहत है।
वहीं 2017 में कांग्रेस की चुनावी वैतरणी पार लगाने का जिम्मा उठाने वाले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की यूपी में बढ़ती सक्रियता से भी भाजपा खेमा चिंतित है। बिहार चुनाव में प्रशांत किशोर ही ऐसे शख्स थे, जिन्होंने वहां भाजपा का खेल बिगाड़ा था। अब यूपी में प्रशांत कांग्रेस के लिए सियासी जमीन तैयार कर रहे हैं।