12 साल पूर्व अफगानिस्तान में तालिबानी हमले में शहीद सुपरिटेंडेंट बीआर महेंद्र कुमार सिंह की प्रतिमा और तोरणद्वार अब तक नहीं लग सका। राष्ट्रपति शौर्य च्रक प्रदत्त महेंद्र कुमार सिंह की प्रतिमा लगवाने को सरकार ने वादा किया था लेकिन दशक भर बीतने के बाद भी किसी सरकार ने सुध नहीं ली। बुधवार को पत्नी उमा सिंह वाराणसी के जिलाधिकारी को पत्रक देने पहुंची लेकिन किसी अधिकारी से मुलाकात नहीं हुई।
रायफल क्लब के बाहर बेटे निखिल कुमार सिंह के साथ पहुंची उमा सिंह ने बताया कि पति शहीद महेंद्र प्रताप सिंह बीआरओ (बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन) में तैनात थे। भारत सरकार के आदेश पर वह अफगानिस्तान में बतौर कमांडिग ऑफिसर सड़क बनवाने गए थे। अफगानिस्तान के जरंज शहर में वह तालिबान के हमले में 12 अप्रैल 2008 को शहीद हो गए थे।
उनकी वीरता पर शौर्य चक्र से सरकार ने नवाजा और घोषणा किया था कि शहीद महेंद्र सिंह की प्रतिमा लगाई जाएगी। बेटे निखिल ने बताया कि अपने निवास स्थान सिगरा स्थित निराला नगर कॉलोनी में तोरणद्वार और प्रतिमा लगवाना चाहते हैं। इतने दिनों में जिलाधिकारी , विधायकों, नेताओं और प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय तक गुहार लगाई लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला।