बनारस बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय ने इस संबंध में कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस को खुद ही गंभीरता के साथ पहल करनी चाहिए। अदालत के निर्देश पर ही सारा काम हो यह सही नहीं है। पुलिस की गंभीरता मृतक के प्रति सम्मान होगी।
अधिवक्ता अंशुमान त्रिपाठी और वरुण प्रताप सिंह प्रिंस ने कहा कि विसरा के मामले में ज्यादातर यह देखने में आता है कि अदालत का आदेश होता है तभी पुलिस गंभीर होती है और रिपोर्ट जल्दी आती है। अब जिसकी शिनाख्त ही नहीं हुई, उसकी मौत की वजह जानने की जहमत कौन उठाएगा। पुलिस को यह रवैया छोड़ना चाहिए और संदिग्ध हाल में हुई सभी मौतों की वजह जानने के लिए गंभीरता से प्रयास करना चाहिए।