गौरतलब है कि अगस्त 2021 में पांच महिला पक्षकारों ने वाराणसी के सिविल जज की अदालत में ज्ञानवापी मस्जिद के बगल में बने शृंगार गौरी मंदिर में पूजा और दर्शन करने की अनुमति मांगते हुए वाद दाखिल किया था। सिविल कोर्ट ने मस्जिद परिसर का सर्वे करने का आदेश दिया था। सर्वे के बाद महिला पक्षकारों ने दावा किया था कि मस्जिद के वजूखाने में शिवलिंग है। जबकि, अंजुमन इंतेजामियां मसाजिद कमेटी का कहना था कि वह शिवलिंग नहीं, बल्कि फव्वारा है। इसी विवाद को सुलझाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को अदालत ने वैज्ञानिक सर्वे करने का आदेश दे दिया।
जिला जज वाराणसी अजय कृष्ण की ओर से 21 जुलाई को दिए आदेश के अनुपालन में सोमवार की सुबह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के वैज्ञानिकोंं की टीम सील वजूखाने को छोड़कर ज्ञानवापी के शेष परिसर के सर्वे के लिए पहुंच गई थी। भारतीय पुरातत्व विभाग के वैज्ञानिक सर्वे के खिलाफ मसाजिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी। सुप्रीम कोर्ट ने मसाजिद कमेटी को फौरी राहत देते हुए सर्वे पर 26 जुलाई की शाम पांच बजे तक रोक लगा दी और कमेटी को हाईकोर्ट जाने को निर्देशित कर दिया।
इसके बाद मसाजिद कमेटी ने वैज्ञानिक सर्वे को रोकने के लिए हाईकोर्ट की तरफ रुख किया। बुधवार को हाईकोर्ट ने दोनों पक्ष की दलीलें सनी। एएसआई के वैज्ञानिक को भी तलब किया। फिर सर्वे पर लगी रोक को आगे बढ़ाते हुए कहा कि मामले की सुनवाई गुरुवार दोपहर बाद साढ़े तीन बजे होगी।