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घाटों पर घंटा-घड़ियाल गूंजने में लगेगा वक्त

Wed, 07 Sep 2016 02:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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गंगा का वेग थमा है और बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतर रहा है लेकिन घाटों की तस्वीर अब भी भयावह है। छह किलोमीटर के अर्द्धचंद्राकार दायरे में फैले गंगा किनारे के 84 घाटों का आपसी संपर्क अब तक टूटा हुआ है। घाटों की सीढ़ियां सिल्ट (गाद) से पटी पड़ी हैं। घाटों पर 500 से अधिक छोटे-बड़े मंदिरों में गाद भरी हुई है। तेज गति से सफाई हुई तो भी मंदिरों के घंटे-घड़ियाल गूंजने में समय लगेगा। अस्सी घाट स्थित सुबह-ए-बनारस के मंच से लेकर दशाश्वमेध के संध्या आरती स्थल तक की कमोवेश स्थिति एक जैसी ही है। सुबह-ए-बनारस के मंच पर प्रभाती रागों की महफिल अगले तीन दिन में गुलजार होने की उम्मीद है।
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इस बीच पंचगंगा, गंगा महल, सिंधिया घाट, ललिता घाट, दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट, अहिल्याबाई घाट, लाली घाट, तुलसी घाट एवं अस्सी घाट पर हर शाम जहां नियमित गंगा आरती होती है, सिल्ट पूरी तरह से साफ होने में महीने भर से अधिक का वक्त लगेगा। करीब पौन महीने से गंगा आरती प्रभावित है। दशाश्वमेध और शीतला घाट को छोड़ अन्य घाटों की सौ से अधिक सीढ़ियां जलमग्न हैं। बता दें कि नाग नथैया (3 नवंबर) डाला छठ (4 नवंबर), गंगा महोत्सव (11 नवंबर) और देव दीपावली (14 नवंबर) जैसे महत्वपूर्ण आयोजन घाटों पर होने हैं।


संत रविदास घाट पर अगले महीने गंगा महोत्सव होना है, मगर मंच समेत पूरा प्लेटफार्म सिल्ट से पटा पड़ा है। राजघाट से सामने घाट तक किनारे के सैकड़ों मंदिर अब भी जलमग्न हैं। गंगोत्री सेवा समिति से जुड़े मनीष शंकर दुबे कहते हैं, हम निजी संसाधनों से घाट की सफाई कर रहे हैं।
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पर्यटन का प्रमुख केंद्र होने के नाते अस्सी और दशाश्वमेध घाट पर तो साफ-सफाई शुरू हो गई है लेकिन बाकी घाटों पर नगर निगम का सफाई अमला नदारद है। अलबत्ता कुछेक घाटों पर स्थानीय लोग अपने साधनों से सफाई में जुटे हुए हैं।


मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट का 90 फीसद हिस्सा अब भी या तो पानी में डूबा हुआ है या गाद से भरा हुआ है। श्मशान घाट गंदगी और गाद से पटे पड़े हैं। पानी उतरने के हफ्ते भर बाद भी चिताएं ऊपर की सीढ़ियों व गलियारे में ही जल रही हैं। हफ्ते भर में 10 से 12 सीढ़ियों से ही सिल्ट हटाया जा सका है। शवदाह को आने वाले लोग जान जोखिम में डाल दलदली गाद पर चलने को विवश हैं।
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