डॉ. मिश्रा के अनुसार, लॉकडाउन के दौरान प्रतिमाएं तैयार कराना भी बड़ी चुनौती थी। उन्होंने मूर्तिकार राजेश कुमार से संपर्क किया और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र तथा सुभद्रा की प्रतिमाएं बनाने का अनुरोध किया। राजेश कुमार ने केवल तीन दिनों में तीनों प्रतिमाएं तैयार कर दीं। देखने में लकड़ी जैसी दिखाई देने वाली ये प्रतिमाएं वास्तव में प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से निर्मित हैं।
डॉ. मिश्रा का कहना है कि परिस्थितियां सामान्य होने के बाद भी उन्होंने अपने घर की इस रथयात्रा की परंपरा को जारी रखा है। उनका मानना है कि श्रद्धा और आस्था का कोई विकल्प नहीं होता। लॉकडाउन में शुरू हुई यह अनूठी पहल आज उनके परिवार की स्थायी धार्मिक परंपरा बन चुकी है।