महाविद्यालयों में होने वाली नियुक्तियों में प्रबंधन की मिलीभगत से मनमाने ढंग से नियुक्तियां की गईं। इसकी शिकायतें राजभवन से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक हुईं। मामले को संज्ञान में लेकर जांच कमेटी का गठन किया गया। कमेटी ने जांच भी की लेकिन रिपोर्ट ही नहीं सौंपी। ऐसे कई मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
शासन ने जब विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों की नियुक्तियों के जांच के आदेश दिए हैं तो नियुक्तियों में हुईं अनियमितताओं के मामले खुलेंगे। वाराणसी, गाजीपुर, आजमगढ़, बलिया, मऊ, सोनभद्र, मिर्जापुर, भदोही समेत पूर्वांचल के कई जिलों के संस्कृत महाविद्यालयों की गड़बड़ियां सामने आने की संभावना है।