दरअसल, पंडित जी जब "हनुमान लला मेरे प्यारे लला" भजन गा रहे थे तो उनकी आंखें छलकने लगीं और आंसू बहने लगे। ऑनलाइन कार्यक्रम देख रहे दर्शक भी पंडित जी को देख भावुक हो गए। हालांकि, कैमरे के पीछे मौजूद पंडित जी की पुत्री दुर्गा जसराज ने उन्हें संभाला। इस कार्यक्रम को एक लाख 71 हजार 347 लोग लाइव सुन रहे थे।
जब पंडित जी ने गाना शुरू किया तब तकनीकी गड़बड़ी की वजह से प्रसारण बाधित हो गया। वीडियो तो चल रहा था लेकिन आवाज नहीं आ रही थी। ऐसे में श्रोताओं की व्याकुलता कमेंट बॉक्स में आ रहे कमेंट से साफ जाहिर हो रही थी।
कई लोगों ने कमेंट किए प्लीज चेक ऑडियो, तो कोई लिखता आवाज नहीं आ रही। इसी बीच किसी ने लिखा धैर्य का फल मीठा होता है। जल्द ही सुरीला स्वर मुखर होगा। डॉ. प्रीतेश आचार्य का कहना है कि कौन जानता था कि संकटमोचन संगीत समारोह की यह प्रस्तुति उनकी आखिरी प्रस्तुति होगी।