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डेढ़ लाख कंडम वाहन घोंट रहे बनारस का दम

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वाराणसी। मौसम का पारा गिरने के साथ ही वायु गुणवत्ता भी खराब होती जा रही है। शहर की सड़कों पर दौड़ रहे डेढ़ लाख कंडम वाहन भी बनारस का दम घोंट रहे हैं। इसके बावजूद इन पर कोई भी विभागीय कार्रवाई नहीं हो रही है। बात करें आंकड़ों की तो जिले की सड़कों पर दस लाख से अधिक वाहन दौड़ते हैं और हर साल इसमें 20 फीसदी की बढ़ोत्तरी भी होती जा रही है।
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धूल, धुआं और दमघोंटू जहरीली हवा ने बनारस की वायु गुणवत्ता को बिगाड़ दिया है। धूप निकलने से वायु प्रदूषण से दिन में राहत तो मिल रही है लेकिन शाम ढलते ही सांस के रोगियों की परेशानियां बढ़ जा रही हैं। शुक्रवार को पीएम 10 का स्तर अधिकतम 316 और पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर 312 क्युबिक मीटर दर्ज किया गया। शहर में पिछले कई दिनों से शाम होते-होते स्थिति खराब हो जा रही है। रात में नौ बजे एयर क्वालिटी इंडेक्स 235 दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि दिन में हवा और धूप के कारण धूल कणों का स्तर कम था। बीएचयू के वैज्ञानिक प्रो. बीडी त्रिपाठी का कहना है कि वाहनों से निकलने वाला धुंआ और खोदाई स्थल से निकली मिट्टी से उड़ने वाली धूल वायु मंडल में ही फैल जा रही है। धीरे-धीरे बढ़ रहे कोहरे के कारण धुंआ और धूल ऊपर नहीं जा रहा है। इस वजह से वायु प्रदूषण का स्तर बहुत बढ़ गया है। सूर्यास्त के बाद तापमान गिरने से वाहनों से निकलने वाला धुंआ बहुत ऊपर नहीं जा पा रहा है।
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पीएम 10 की अधिकतम मात्रा 312 तक पहुंची
शुक्रवार को अधिकतम पीएम 2.5 का स्तर 312, औसत 223 और न्यूनतम 62 दर्ज किया गया। वहीं पीएम 10 के कणों का अधिकतम स्तर 312, औसत 235 और न्यूनतम 170 रहा। नाइट्रोजन आक्साइड की अधिकतम मात्रा 27 और ओजोन की 65 रही। बृहस्पतिवार को अधिकतम पीएम 2.5 का स्तर 345, औसत 237 और न्यूनतम 96 दर्ज किया गया। वहीं पीएम 10 के कणों का अधिकतम स्तर 402, औसत 273 और न्यूनतम 181 रहा। नाइट्रोजन आक्साइड की अधिकतम मात्रा 27 और ओजोन की 66 रही।
कराई जा रही है डस्ट सैंपलिंग
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी कालिका सिंह ने बताया कि शहर में चल रहे निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल के कारण वायु गुणवत्ता का स्तर खराब हो रहा है। शहर के प्रमुख विकास कार्यों की डस्ट सैंपलिंग कराई जा रही है। सभी को मानकों का पालन करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही निर्माण स्थल पर पीटीजेड (पैन टिल्ट जूम) कैमरे लगाने का निर्देश दिया गया है। साथ ही कार्य वाले स्थानों पर नियमित जल छिड़काव और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की नियमित जांच कर उनके खिलाफ कार्रवाई का निर्देश जारी किया है। कहीं भी कूड़ा जलता मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने, कूड़ा जलाने की घटनाएं रोकने और निर्माण स्थलों पर धूल न उड़ने देने के भी निर्देश दिए गए हैं।
आम आदमी कैसे बने वायु स्वच्छता में सहयोगी
बीएचयू के वैज्ञानिक प्रो. बीडी त्रिपाठी ने बताया कि हमारी छोटी से पहल भी वायु प्रदूषण को कम करने में सहयोगी हो सकती है। हमें कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना चाहिए।
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-निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करें, क्योंकि सड़क पर जितनी कम गाड़ियां रहेंगी उतना कम प्रदूषण भी होगा।
-मुमकिन हो तो ऑफिस जाने के लिए सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करें। आप साइकिल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
-घरों में सोलर पैनल लगवाने के साथ-साथ आप सौर ऊर्जा पर चलने वाले वाहनों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
-अगर निजी वाहनों का उपयोग करते हैं तो कार पूलिंग करनी चाहिए। इससे आप एक ही कार में अन्य लोगों को भी बैठा कर ले जा सकते हैं ।
-अपने बगीचे की सूखी पत्तियों को जलाने की जगह उनका खाद बनाकर बगीचे में ही इस्तेमाल करें।
- घर से निकलने वाले कूड़े को अलग-अलग करके कूड़े वाले को दें। घर से निकलने वाले कूड़े में आग न लगाएं।
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