पहाड़ों पर बर्फबारी से गंगा का जलस्तर बेतहाशा बढ़ा और बुधवार को 84 घाटों का आपसी संपर्क टूट गया। सीढि़यां पानी में डूब गई हैं। अब गंगा की तरफ से सीढि़यों के सहारे एक दूसरे घाट तक नहीं जाया जा सकेगा। सड़क मार्ग से घाटों तक जाने का विकल्प खुला रहेगा। दूसरी तरफ, दशाश्वेमेध घाट पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती का स्थल भी डूब गया है। अब निर्धारित स्थल से आरती दस फीट दूर होने लगी है। वहीं, कानपुर के गंगा बैराज से बुधवार को रात आठ बजे तक 2.48 लाख 880 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
यह पानी दो से तीन दिन में वाराणसी पहुंचेगा। इससे जलस्तर में और बढ़ोतरी की उम्मीद है। बुधवार की रात 9 बजे तक जलस्तर 63.13 मीटर रिकॉर्ड किया गया था। इसी वजह से घाटों का आपसी संपर्क भी टूटा है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के शवदाह स्थल भी डूब गए हैं। इससे शवों के अंतिम संस्कार में दिक्कत आ रही है। जलस्तर बढ़ने का सिलसिला ऐसे ही चलता रहा तो जल्द ही नावों का संचालन भी रोकना पड़ सकता है।
बिजली की कटौती ने बुधवार को लोगों की परेशानी बढ़ा दी। शहर के कई इलाकों में दिन भर बिजली की आवाजाही जारी रही। कहीं ट्रांसफार्मर में लगे तार जल गए तो कहीं पोल से तार टूटकर गिरने से आपूर्ति बाधित रही। बुधवार को शाम से मढ़ौली, चांदपुर, भिटारी के साथ ही वैष्णवपुरी काॅलोनी, सरस्वती नगर काॅलोनी में रात में कटौती से अंधेरा छाया रहा। लोगों ने उपकेंद्र पर फोन कर जानकारी लेनी चाही, सही जानकारी नहीं मिल पाई। मंडुवाडीह डीपीएच उपकेंद्र पर तैनात कर्मचारी भी यह नहीं बता पा रहे थे कि बिजली कब आएगी। मढ़ौली में रहने वाले लोगों ने बताया कि बुधवार को शाम से लेकर रात 11 बजे तक आवाजाही जारी रही, लेकिन रात 11 बजे बिजली कट गई और 12 बजे के बाद आई।