‘बाल समय रवि भक्ष लियो तब तीनहुं लोक भयो अंधियारो/ताहि सों त्रास भयो जग को यह संकट काहु से जात न टारो...।’ वर्ष भर रामकाज के लिए खड़े रहने वाले संकट मोचन हनुमान की जयंती पर मंगलवार को बैठकी की झांकी सजाई गई। बैठकी शृंगार के दर्शन के लिए आस्था का सैलाब उमड़ा तो मंदिर परिसर में तिल रखने की जगह नहीं बची। शोभायात्राओं में आरती की थाल सजाकर महिलाएं कतारबद्ध होकर चलीं तो डांडिया नृत्य से युवक-युवतियों ने हर किसी का ध्यान खींचा। उधर, भिखारीपुर तिराहे से सुबह निकाली गई श्री हनुमान ध्वजा यात्रा में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा।
सुसज्जित वाहन पर संकट मोचन की झांकी सजाई गई। रथों पर भगवान शिव, गणेश, हनुमान के विग्रहों की झांकियां निकाली गईं। 11 वैदिक विद्वानों ने महाआरती की। इसके बाद शोभायात्रा निकाली गई। मंगल ज्योति के साथ हनुमान पताका और 21 फीट ऊंचे हनुमान के स्वरूप की झांकी आकर्षण का केंद्र बन गई। बैंज-बाजे के साथ 200 बटुकों की टोलियां ध्वजा लेकर चल रही थीं तो 21 युवा डमरू नाद कर रहे थे। राम दरबार की झांकी की छटा अलग मन मोह रही थी। 21 युवक-युवितयों के समूह डांडिया नृत्य से माहौल को खुशनुमा बना रहे थे। रास्ते भर फुहारों, पुष्पों की वर्षा होती रही। त्रिदेव मंदिर के सामने आरती उतारी गई। हाथी, घोड़े के साथ 1100 लाल पताका लिए श्रद्धालु चल रहे थे। मंदिर पहुंचने पर बैठकी की झांकी सजी। राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, हनुमान के स्वरूपों का विराजमान कराया गया था। कौशल शर्मा, विश्वनाथ पोद्दार, रमेश चौधरी, सुरेश तुलस्यान, श्रीनारायण खेमका, कृष्ण कुमार काबरा, अनिल सराफ, सुरेश तुलस्यान, तारा शमा, निधिदेव अग्रवाल समेत तमाम लोग मौजूद थे।
भिखारीपुर से निकाली गई शोभायात्रा में 40 किमी से श्रद्धालु पैदल चलकर नाचते-गाते पहुंचे। रामसिंहपुर, कनकसराय, कोनिया, जलालीपट्टी, कंचनपुर, सुंदरपुर, जानकीनगर, डाफी, शिवरतनपुर, अदलपुरा, सरायनंदन, खोजवां से बड़ी तादाद में श्रद्धालु ध्वजा लेकर शामिल हुए। नेवादा, सुंदरपुर, नरिया, मालवीय प्रतिमा लंका होते हुए शोभायात्रा दिन के 10:30 बजे संकट मोचन पहुंची। यहां महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया।