वाराणसी। पेयजल की लीकेज समस्या का समाधान डीएम कौशल राज शर्मा ने निकाला है। उनके अनुसार जल निगम की 13 टीमें गठित की गईं हैं। टीम में विभागीय अधिकारियों के साथ ही जिलास्तरीय अधिकारियों को भी लगाया गया है। अब कुछ कनेक्शन नई और कुछ कनेक्शन पुरानी लाइनों पर रखे जाएंगे ताकि टेस्टिंग के दौरान पाइप फटने की समस्या से निजात मिल सके।
राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल की बैठक में खुलासा हुआ था कि ट्रांस वरुणा में 228 किमी पाइप में 700 जगह लीकेज है। इससे 298 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी जनता प्यासी है। इस मामले में मंत्री ने डीएम को समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी है। पूर्व में जेएनएनयूआरएम के तहत पाइप लाइन बिछाई गई थी। इन पाइपों में जगह-जगह गैप होने के कारण जब कभी टेस्ट होता है तो सड़क के बीच से फौव्वारे फूट पड़ते हैं। इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री तक से हुई है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर कार्रवाई भी हुई थी। बाद में तय हुआ कि इन लीकेजों को दुरुस्त किया जाएगा। लेकिन आपसी समन्वय नहीं होने से ढिलाई आ रही है। इसके अलावा कुछ पाइपों को मोबाइल कंपनियों की ड्रिलिंग मशीनों ने खराब कर दिया था, जिस पर जुर्माना भी लगाया गया था।
एक लीकेज से हजार लीटर पानी हो रहा बरबाद
जलकल से रिटायर्ड एके सिंह के अनुसार प्र्रति लीकेज 1000 लीटर पानी हर दिन बरबाद हो रहा है। इस हिसाब से सात लाख लीटर पानी प्रतिदिन बह रहा है। एक व्यक्ति को कम से कम प्रतिदिन नहाने, धोने, पीने आदि में 50 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। लीकेज ठीक कर लिए जाएं तो 14000 लोगों की पानी की समस्या दूर हो सकती है। अंग्रेजों के जमाने की पुरानी पेयजल की पाइप लाइन है, जो 2010 में जेएनएनयूआरएम के तहत पाइप डाली गई थी। उसी समय कनेक्शन नहीं दिया गया।