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अतिक्रमण और कूड़े के बोझ से कराह रहे तालाब

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वाराणसी। शहर में कुंड और तालाबों के पाटने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शासन और प्रशासन की तमाम कोशिशों के बाद भी कुंड और तालाबों पर अतिक्रमण होने से उनके अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। पांडेयपुर क्षेत्र के चार प्रमुख तालाबों की हालत भी खस्ता हो चुकी है। इनमें से दो को पाट दिया गया है। पांडेयपुर तालाब और चौहानों का पोखरा अंतिम सांसें गिन रहे हैं।
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मानसिक अस्पताल से सटे पांडेयपुर तालाब के नाम से प्रसिद्ध तालाब हर दिन सिकुड़ता चला रहा है। दस साल पहले तक करीब आठ एकड़ में फैले आराजी नंबर 149 वाले इस तालाब के उत्तरी, पूर्वी और पश्चिमी छोर पर अतिक्रमण है। सर्वाधिक अतिक्रमण उत्तर की ओर हैं। 2.703 हेक्टेयर रकबा वाला तालाब मौजूदा समय में आधे से भी कम रह गया है। इस तालाब से 2009 में पहली बार अतिक्रमण हटाया गया था। उसके बाद पहले से ज्यादा पक्के निर्माण हो गए। दिसंबर 2017 में जलाशयों के संरक्षण के लिए हुई बैठक में तालाब की खोदाई का आदेश दिया गया। बिना अतिक्रमण हटाए खोदाई शुरू कर दी गई। ठेकेदार ने मिट्टी बेचने के चक्कर में 25 फीट तक खोदाई करा दी।
वहीं दूसरी तरफ पांडेयपुर स्थित चौहान का पोखरा को कूड़े से पाटा जा रहा है। बीच के कुछ हिस्से को छोड़कर पानी की जगह इस पोखरे को कूड़ा और मलबे से पाट दिया गया है। स्थानीय जनता ने बताया कि पहाड़िया स्थित आराजी नंबर 92 और पैगंबरपुर में आराजी नंबर 154 जहां .490 हेक्टेयर और 0.093 हेक्टेयर रकबे में पोखरा था। उसे नगर निगम ने ही कूड़ों से पटवा कर समतल कर दिया। मवइयां स्थित आराजी नंबर 192.1 जिसका रकबा 0.405 हेक्टेयर था। तीन हिस्से से अधिक रकबा नगर निगम द्वारा ही कूड़ों से पाटा जा चुका है। वहीं खजुरी के निकट पृथ्वीश्वर मंदिर पोखरे की दशा भी ऐसी ही है। काशी खंड के इस स्थान पर भी पोखरे का नामोनिशान मिट चुका है।
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पंचक्रोशी यात्रियों का था प्रमुख ठिकाना
काशी में पंचक्रोशी यात्रा करने वालों के लिए पांडेयपुर तालाब प्रमुख आश्रय स्थल था। तालाब के चारों ओर नीम और पीपल के वृक्षों की कतार हुआ करती थी। अब तो उनके निशान तक नहीं बचे हैं। पांडेयपुर की रामलीला के तहत विजयादशमी का भव्य मेला भी तालाब पर हुए अतिक्रमण का शिकार हो चुका है। जिस स्थान पर वृहद मेला लगता था, वहां अनाधिकृत रूप से बस्ती बसा दी गई है।
पंचक्रोशी परिक्रमा के यात्रियों के लिए यह मुख्य पड़ाव हुआ करता था। तालाब को कूड़े से पाट दिया गया है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। - आशुतोष सिंह, गायत्री नगर कालोनी
अतिक्रमण और गंदगी के कारण यह प्रमुख जलतीर्थ अब अंतिम सांसें गिन रहा है। हालत यह है कि बदबू के कारण इसके आसपास से गुजरना भी मुश्किल है। - अजीत सिंह, पांडेयपुर
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