कंटेनर की कमी के कारण रुका जल परिवहन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2019 में रामनगर के राल्हूपुर में ढाई सौ करोड़ की लागत से तैयार मल्टीमोडल टर्मिनल देश को समर्पित किया था। इस दौरान कोलकाता से आए पेप्सिको के 16 कंटेनर को वाराणसी लाया गया था। इसके बाद यहां से इतने ही कंटेनर लेकर जलपोत रवाना हुआ था। फिर फरवरी-2019 में डाबर कंपनी का माल लेकर जहाज यहां पहुंचा।
इसके बाद न तो कोई जलपोत वाराणसी आया और न ही यहां से गया। सूत्रों की मानें तो जलपरिवहन के लिए कई बड़ी कंपनियों ने अपने उत्पाद जलमार्ग से भेजने पर सहमति जताई है। जलपोत की कमी के चलते सामानों का आवागमन नहीं हो पा रहा है। आईडब्लूएआई को जलपोत निर्माण के क्षेत्र में बड़े निवेश का इंतजार है।
वहीं दूसरी ओर वाराणसी व आसपास के उद्यमी जलमार्ग से अपने सामान फिलहाल हल्दिया के रास्ते दूसरे देश नहीं भेज रहे। इसका कारण हल्दिया तक लगने वाला लंबा समय और हल्दिया पोर्ट पर सामान के रख रखाव की उचित व्यवस्था न होना है। गंगा में जलपरिवहन में निरंतरता आने में अभी पांच से छह महीने और लग सकते हैं।
बेहतर करनी होगी कनेक्टविटी
जल परिवहन के जरिए सामान भेजने में किराया और समय ज्यादा लगता है। इसमें वाराणसी में सड़क मार्ग से बेहतर कनेक्टविटी नहीं होने के कारण सामान जेट्टी तक पहुंचने में दिक्कत होती है। इस परियोजना में काफी सुधार की जरूरत है।
आरके चौधरी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन