काशी में जलापूर्ति के लिए शहर को आबादी के हिसाब से दो भागों में बांटा गया है। सिस वरुणा और ट्रांस वरुणा। इसके बाद भी शहर की पानी की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। सिस वरुणा में 466 किलोमीटर लंवी पाइपलाइन अंग्रेजों के समय बिछाई गई थी, जो इस वक्त भी चालू है। ट्रांस वरुणा क्षेत्र में 150 किलोमीटर पुरानी पाइप लाइन से जलापूर्ति हो रही है। इन पाइपलाइन को बिछे कई साल बीत चुके हैं। ये डैमेज भी होती जा रही हैं। जिसकी वजह से घरों में न सिर्फ गंदा पानी पहुंच रहा है, बल्कि हर रोज पानी नालों में बह रहा है। शहर के अधिकांश इलाकों में पुरानी पाइप लाइन होने की वजह से पानी को नालों में बहने से रोक पाना जलकल के बस की बात नहीं है।
जलकल की ओर से भूमिगत वाटर लाइन फॉल्ट ढूंढने की कोई तकनीक नहीं है। ड्रिलिंग के चलते पाइप लाइनों में हुए छेद से हो रही दूषित जलापूर्ति, लीकेज आदि का पता लगाने के लिए थोड़ी थोड़ी दूरी पर सड़कों की खोदाई करनी पड़ती है। बिजली विभाग में फॉल्ट लोकेटर मशीन है। जो यह बता देती है कहां पर तार पंचर है, लेकिन जलकल के पास इस तरह का कोई फॉल्ट लोकेटर मशीन नहीं है।
क्या बोले अधिकारी
शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को सुधारने के लिए बड़ा काम होने जा रहा है। शहर के प्राने 18 वाडों की सीवर और पेयजल लाइन बदली जाएगी। ज्यादातर पानी की समस्या इन्हीं वार्डों में है। यह काम पूरा होने के बाद यहां पानी से जुडी हर प्रकार की समस्याओं का समाधान हो जाएगा। जल्द ही काम शुरू होने वाला है। -अनूप कुमार सिंह, महाप्रबंधक जलकल