वाराणसी। बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से पानी छोड़े जाने के कारण गंगा और वरुणा नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार को गंगा का जलस्तर तीन सेंटीमीटर बढ़कर 61.93 मीटर पर पहुंच गया, जबकि एक दिन पहले यह 61.90 मीटर था। वहीं, वरुणा नदी का जलस्तर स्थिर रहा। शुक्रवार को भी वरुणा का जलस्तर 68.15 मीटर दर्ज किया गया।
दोनों नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे हैं, लेकिन लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। गंगा के जलस्तर में वृद्धि के साथ निचले इलाकों और कुछ घाटों की सीढ़ियों तक पानी पहुंचने लगा है। जल पुलिस ने दशाश्वमेध, अस्सी, राजघाट, नमो घाट और अन्य प्रमुख घाटों पर गश्त बढ़ा दी है। नाव संचालकों को निर्धारित सीमा के भीतर ही नाव संचालन करने तथा क्षमता से अधिक यात्रियों को न बैठाने के निर्देश दिए गए हैं। घाटों पर लोगों को गहरे पानी में न उतरने की चेतावनी भी दी जा रही है।
उधर, वरुणा नदी की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। जलस्तर बढ़ने के साथ नदी में बड़ी मात्रा में जलकुंभी, प्लास्टिक कचरा और अन्य गंदगी बहकर आ रही है, जिससे नदी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है। कई स्थानों पर जलकुंभी की मोटी परत दिखाई दे रही है। यदि लगातार बारिश होती रही तो जल निकासी की समस्या और बढ़ सकती है। जल पुलिस प्रभारी सुधीर त्रिपाठी ने बताया कि राहत एवं बचाव उपकरणों की जांच कर ली गई है और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई के लिए टीमें तैयार हैं। लगातार निगरानी की जा रही है।
बाढ़ चौकियों से राहत शिविर तक तैयारियां पूरी रखें : मंडलायुक्त
वाराणसी। संभावित बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए मंडलायुक्त एस. राजालिंगम ने शुक्रवार को वाराणसी मंडल के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतने, बाढ़ चौकियों पर सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी के निर्देश दिए। बैठक में वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर समेत मंडल के सभी जिलों की तैयारियों की समीक्षा की गई। मंडलायुक्त ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य तत्काल शुरू किए जाएं और प्रभावित लोगों तक समय पर भोजन, पेयजल, दवा तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं पहुंचाई जाएं।
उन्होंने बाढ़ चौकियों पर मेडिकल टीम, पुलिस गश्त, महिला स्टाफ और लेखपाल की तैनाती रोस्टर के अनुसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही अधिकारियों से कहा कि राहत शिविरों में बच्चों के लिए दूध, चना और गुड़ की पर्याप्त उपलब्धता रहे। इसके अलावा सोलर लाइट, स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। मंडलायुक्त ने गोवंश के सुरक्षित संरक्षण, पशुओं के नियमित टीकाकरण तथा बीमारियों की रोकथाम के लिए पहले से कार्ययोजना तैयार रखने को कहा। बैठक में तटबंधों की निगरानी, नावों की उपलब्धता, राहत सामग्री के भंडारण, बाढ़ चौकियों की सक्रियता और आपातकालीन संचार व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। उन्होंने जलस्तर और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखते हुए आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े अधिकारियों ने अपने-अपने जिलों की तैयारियों की जानकारी दी। चंदौली के जिलाधिकारी चंद्रमोहन गर्ग ने बताया कि बाढ़ संभावित गांवों की पहचान कर ली गई है और स्थानीय नाव संचालकों से समन्वय स्थापित कर नावों की व्यवस्था सुनिश्चित कर ली गई है। गाजीपुर के जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने बताया कि जिले में 1200 लाइफ जैकेट वितरित की जा चुकी हैं तथा 228 नावों की व्यवस्था की गई है। सिंचाई विभाग की छह परियोजनाएं पूरी कर ली गई हैं और पशुओं के टीकाकरण का कार्य भी नियमित रूप से चल रहा है।