वाराणसी। काशी का भूगर्भ जल भगवान शिव के निर्माल्य से ऊर्जित होगा। देवाधिदेव को चढ़ने वाला जल अब सीधे भूगर्भ में जाएगा। काशी के सभी शिवालयों में रोटरी क्लब के अभियान ‘तेरा तुझ को अर्पण’ का शुभारंभ किया गया। संस्था की ओर से जलसंरक्षण की दिशा में शिवालयों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से अभियान की शुरुआत की गई। मानमंदिर घाट पर स्थित रामेश्वर महादेव मंदिर में गुरुवार को वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का उद्घाटन हुआ।
जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने दशाश्वमेध घाट पर मानमंदिर वेधशाला के समीप स्थित रामेश्वर मंदिर में नवनिर्मित वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का लोकार्पण किया। आयोजन की अध्यक्षता प्रेसिडेंट चंद्रशेखर कपूर, संचालन मनीष खत्री, समन्वय डॉ. अजीत सैगल, संयोजन अंकिता खत्री, स्वागत योगेश अग्रवाल, धन्यवाद नारायण अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर आशीष बसाक, रवि झा, शिल्पी अग्रवाल, रेणु शाह, अनिता अग्रवाल, अभय अग्रवाल, धीरज शर्मा आदि मौजूद रहे।
वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के तहत किस जगह जमीन में गड्ढा खोदकर काफी नीचे तक पानी को जाने के लिए पाइप लाइन या ईंट और पत्थरों से फिल्टर पानी को जाने की व्यवस्था की जाती है। ताकि बरसात का पानी सीधे जमीन के नीचे मौजूद पानी में लाकर मिले। इससे पानी के नुकसान या दूषित होने की आशंका बेहद कम हो जाती है और बरसात या अन्य तरह का पानी जो नालियों के जरिये तालाबों या नदियों में नहीं मिलता बल्कि सीधे भूगर्भ के जल में जा कर मिलता है और जलस्तर को बढ़ाता है।
वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम मुख्य रूप से बड़ी इमारतों या सड़कों के किनारे लगाया जाता है। काशी के शिव मंदिरों में हर साल लाखों लीटर पानी शिवलिंगों पर जल चढ़ाने या जलाभिषेक में लगता है। शिवालयों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने से शिवलिंग पर चढ़ा जल सीधे जमीन के अंदर चला जाएगा और जमीन के अंदर मौजूद पानी में मिलेगा।
शिवालयों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का प्रयोग होने से जमीन के अंदर हर मौसम में पानी पहुंचने लगेगा। अमूमन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बरसात के मौसम में ही ज्यादा प्रयोग में आता है, लेकिन शिवालयों में प्रतिदिन पूजा और जलाभिषेक किया जाता है। शिवालयों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के प्रयोग होने से रोज भूगर्भ में जल पहुंचेगा और भूगर्भ के जलस्तर में तेजी से वृद्धि होगी।