यहां बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 में 58.82 फीसदी मतदाताओं ने वाराणसी जिले में मतदान किया था। इस लिहाज से भी .2 फीसदी मतदान कम हुआ है। कम हुए मतदान को लेकर राजनीतिक दलों के अपने दावे हैं और उसके असर पर भी लोग समीक्षा कर रहे हैं।
मतदान के बाद आठों विधानसभा की स्थिति लगभग साफ हो गई है। भाजपा को मोदी मैजिक पर पूरा विश्वास है और उसका दावा है कि पिछले चुनाव की तरह क्लीन स्वीप ही करेंगे। उधर, विपक्ष के प्रत्याशियों को नाराज मतदाताओं से उम्मीद है। यही कारण है विपक्ष के प्रत्याशी मतदान के दिन तक महंगाई और बेरोजगारी को मुद्दा बनाए हुए थे।
दरअसल, विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के चयन के बाद राजनीतिक दलों ने प्रचार में ताकत झोंकी थी। मतदान से एक सप्ताह पहले तक कई सीटों पर सपा और कांग्रेस की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही थी। मगर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो दिवसीय प्रवास के दौरान हुए कार्यक्रमों ने प्रत्याशियों के प्रति नाराजगी को कम करने के साथ ही भाजपा के प्रति रुझान को बढ़ा दिया।
हालांकि सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी रोड शो और मंदिर दर्शन के बहाने जरूर अपने प्रत्याशियों को मजबूत किया था। फिलहाल कम हुए मत प्रतिशत को लेकर अप्रत्याशित नतीजों से इनकार नहीं किया जा सकता। अब लोगों की निगाह परिणाम पर टिकी है।